
नई दिल्ली। जैसे-जैसे देश में त्योहारों का मौसम आ रहा है, चीनी की कीमतों (india sugar prices) को लेकर राजनीति गरमा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पिछले 3 महीनों में चीनी की कीमतें 40 प्रतिशत बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि देश में चीनी का स्टॉक पिछले 9 सालों में सबसे कम क्यों है? सरकार गन्ने और अनाज को इथेनॉल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल करने की पॉलिसी पर दोबारा विचार क्यों नहीं कर रही है?
पिछले नौ सालों में सबसे कम स्टॉक (india sugar prices) और 10 लाख टन इंपोर्ट का जिक्र करते हुए खडग़े ने कहा कि इंपोर्ट चीनी के बैलेंस पर निर्भर करता है, न कि प्रोडक्शन, कंजम्पशन, स्टॉक, कीमतों या ई20 पर। उन्होंने कहा 2025-26 के लिए शुरुआती प्रोडक्शन का अनुमान 349 लाख टन था, जो अब घटकर लगभग 280 लाख टन रह गया है।
बीजेपी ने खडग़े के आरोपों का जवाब दिया
भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब दिया। मालवीय ने कहा कि चीनी की कीमतों और इम्पोर्ट को ई20 पॉलिसी से जोडऩा सिफऱ् एक राजनीतिक सुविधा है।
अमित मालवीय ने क्या कहा –
साल 2025-26 में चीनी का शुरुआती प्रोडक्शन 349 लाख टन था, जो असल में घटकर लगभग 280 लाख टन रह गया है। चीनी प्रोडक्शन में तेज़ गिरावट और खपत में ठहराव ने क्लोजिंग स्टॉक (india sugar prices) पर दबाव डाला है। इससे कीमत पर दबाव पड़ा है। घरेलू बाज़ार में उपलब्धता और कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए चीनी का इम्पोर्ट करना एक बैलेंस्ड पॉलिसी प्रोसेस है। इसे ई20 से जोडऩा आंकड़ों के खिलाफ़ है। यह बताते हुए कि यूपीए-2 के समय में भी, यानी 2009 से 2014 के बीच, ई20 इथेनॉल पॉलिसी न होने पर भी चीनी का बड़ा इम्पोर्ट हुआ था, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने साफ़ किया कि इथेनॉल पॉलिसी का इस कीमत बढ़ोतरी से कोई सीधा कनेक्शन नहीं है।



