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Gulf Crisis : खाड़ी में फंसा तेल और अटकी कमाई, आखिर अचानक क्यों बिगड़ गए हालात

ओमान की खाड़ी को लेकर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज (Gulf Crisis) हो गई है। तेल व्यापार से जुड़े लोग लगातार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका असर सीधे बाजार और कीमतों पर पड़ सकता है। हालात ऐसे बन गए हैं कि समुद्र में खड़े जहाज ही अब चर्चा का बड़ा कारण बन चुके हैं।

इधर आम लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम का असर आगे कितना गहरा हो सकता है। जानकार इसे बढ़ते दबाव की रणनीति मान रहे हैं, जिससे स्थिति और उलझती नजर आ रही है।

खाड़ी में फंसे टैंकर (Gulf Crisis)

Gulf of Oman में जारी सैन्य नाकेबंदी का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। Iran का कच्चा तेल लेकर जा रहे कई टैंकर रास्ते में ही अटक गए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 31 जहाज ऐसे हैं जो लाखों बैरल तेल लेकर खड़े हैं और अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

अरबों डॉलर की पेमेंट रुकी

United States Department of Defense के अनुमान के मुताबिक इस स्थिति की वजह से ईरान को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। करीब 4.8 बिलियन डॉलर की रकम अटकी हुई (Gulf Crisis) बताई जा रही है। यह नुकसान उस समय हो रहा है जब दोनों देशों के बीच तनाव पहले से ही बना हुआ है और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है।

नाकेबंदी का बढ़ता असर

अधिकारियों के अनुसार नाकेबंदी लागू होने के बाद 40 से ज्यादा जहाजों का रास्ता बदल दिया गया है। कई जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली और कुछ को बीच में ही रोक दिया गया। दो जहाजों को पूरी तरह जब्त किए जाने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है।

स्टोरेज की बड़ी चुनौती

मौजूदा हालात में नए टैंकर तेल लोड नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जमीन पर मौजूद भंडारण सुविधाएं भी अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में पुराने जहाजों को ही अस्थायी भंडारण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो यह दिखाता है कि समस्या अब जमीन पर भी असर डाल रही है।

महंगे रास्तों की मजबूरी

कुछ जहाजों ने तेल पहुंचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने शुरू (Gulf Crisis) कर दिए हैं। खासकर चीन तक पहुंचने के लिए लंबा और महंगा मार्ग लिया जा रहा है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं।

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