Bulldozer Action : वोट देने के बाद भी उजड़ गया घर, मासूम बच्ची की चिट्ठी पढ़ लोग हुए भावुक

नेपाल की राजधानी काठमांडू में चल रहे बुलडोजर अभियान के बीच एक छोटी बच्ची की चिट्ठी ने लोगों को झकझोर कर (Bulldozer Action) रख दिया है। घर टूटने के बाद अस्थायी शिविर में रह रही 11 साल की बच्ची ने प्रधानमंत्री को ऐसा सवाल लिखा, जिसे पढ़कर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई। लोग बच्ची की पढ़ाई और परिवार की हालत को लेकर चिंता जताते नजर आए।
बस्ती हटाने की कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। इसी बीच तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली राधिका महतो की लिखी चिट्ठी तेजी से चर्चा में आ गई। बच्ची ने पूछा कि जब उसके परिवार ने चुनाव में समर्थन दिया था तो फिर उनका घर क्यों तोड़ दिया गया। आसपास के लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बाद बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
बच्ची ने चिट्ठी में पूछे सीधे सवाल : Bulldozer Action
राधिका महतो ने प्रधानमंत्री बालेन शाह को लिखे पत्र में कहा कि उसके परिवार ने चुनाव में उनकी पार्टी और घंटी चुनाव चिन्ह को वोट दिया था। इसके बावजूद उनका घर तोड़ दिया गया। बच्ची ने लिखा कि अब उनके पास रहने की जगह नहीं बची और पढ़ाई भी रुक गई है। उसने यह भी कहा कि परिवार के पास किराए पर घर लेने तक के पैसे नहीं हैं और मौजूदा हालत पहले से ज्यादा खराब हो गई है।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद बदली जिंदगी
करीब तीन हफ्ते पहले तक राधिका अपने परिवार के साथ थापाथली इलाके की झुग्गी बस्ती में रहती थी। वहीं पास के स्कूल में वह पढ़ाई कर रही थी। लेकिन प्रशासन ने इलाके में बनी सैकड़ों झोपड़ियों और अस्थायी ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।
इसके बाद प्रभावित परिवारों को काठमांडू से दूर बनेपा नगरपालिका के अस्थायी शिविरों में भेजा गया। घर उजड़ने के साथ बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी बड़ा असर पड़ा है।
पढ़ाई जारी रखने की लगाई गुहार (Bulldozer Action)
बच्ची ने अपनी चिट्ठी में प्रधानमंत्री से रहने की जगह और स्कूल की व्यवस्था करने की मांग की है। उसने लिखा कि उन्हें पढ़ने के लिए स्कूल चाहिए ताकि पढ़ाई बीच में बंद न हो।
बताया जा रहा है कि पिछले दो हफ्तों में 15 हजार से ज्यादा भूमिहीन लोगों को हटाया गया है। इस दौरान हजारों अस्थायी मकान और ढांचे तोड़े गए।
सरकार की कार्रवाई पर बढ़ा विरोध
सरकार का कहना है कि जिन इलाकों में कार्रवाई हुई वहां सरकारी जमीन और नदी किनारे अवैध कब्जा किया गया था। लेकिन इस अभियान के बाद विरोध भी तेज हो गया है।
मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए गरीब परिवारों को बेघर किया जा रहा है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
अदालत ने भी जताई चिंता
मामला नेपाल के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच (Bulldozer Action) चुका है। अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि उचित पुनर्वास योजना के बिना लोगों को हटाना सही नहीं होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि विस्थापन के दौरान लोगों के आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।
वहीं सरकार का कहना है कि शहर की व्यवस्था सुधारने और सरकारी जमीन खाली कराने के लिए यह अभियान जरूरी है। दूसरी तरफ कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग उठने लगी है।



