छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Manuscript Survey : सदियों पुराने बक्से से निकला वो ‘शाही दस्तावेज’ जिसने खोल दिए सरगुजा रियासत के सबसे बड़े राज!

देश की प्राचीन ज्ञान-संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए चलाया जा रहा राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान (Chhattisgarh Manuscript Survey) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अभियान का प्रथम चरण 15 जून को सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया। इस राष्ट्रव्यापी मुहिम के तहत छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से प्राचीन ज्ञान, इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी कई अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ हस्तलिखित पाण्डुलिपियां (मैनुस्क्रिप्ट्स) सामने आई हैं,

जिनका अब वैज्ञानिक तरीके से डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। अभियान के आखिरी दिनों में अम्बिकापुर नगर के दो प्रमुख संरक्षकों के व्यक्तिगत संग्रह में मौजूद ऐतिहासिक दस्तावेजों का बारीकी से सर्वेक्षण किया गया, जिसने इतिहासकारों को बेहद अचंभित किया है।

स्वतंत्रता पूर्व का शाही आवेदन बरामद

सर्वेक्षण टीम को अम्बिकापुर के बिलासपुर चौक निवासी डॉ. सुधीर पाठक के निजी संग्रह से संवत् 1866 (प्राचीन काल) में हस्तलिखित ‘वनदुर्गा महात्म्य’ की एक अत्यंत दुर्लभ पाण्डुलिपि प्राप्त हुई है। इसके साथ ही, इस संग्रह से तत्कालीन सरगुजा महाराज को संबोधित भूमि संबंधी एक ऐतिहासिक आवेदन पत्र भी मिला है, जो स्वतंत्रता पूर्व (प्री-इंडिपेंडेंस एरा) का है।

डॉ. पाठक ने बताया कि यह आवेदन पत्र उनके पूर्वजों द्वारा लिखा गया था, जिसे उनके परिवार ने पीढ़ियों से एक अनमोल धरोहर की तरह सुरक्षित रखा हुआ है। गौरतलब है कि अम्बिकापुर में पूर्व में भी वनदुर्गा पर आधारित कई हस्तलिपियां मिल चुकी हैं, जो इस क्षेत्र के गहरे धार्मिक जुड़ाव को प्रमाणित करती हैं।

अधिवक्ता वेणुधर सिंह के पास मिली राजाओं की विरुदावली

इसी कड़ी में, अम्बिकापुर के बाबूपारा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता वेणुधर सिंह के संग्रह से ‘महामाया विजयोत्सव वंदना’ नामक एक और अत्यंत महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि (Chhattisgarh Manuscript Survey) खोजी गई है। इस ऐतिहासिक पाण्डुलिपि में सरगुजा रियासत के तत्कालीन महाराज रघुनाथ शरण सिंह देव तथा महाराज रामानुज शरण सिंह देव बहादुर की ‘विरुदावली’ (प्रशस्ति गान) का विशेष उल्लेख मिलता है। हालांकि, इस विशिष्ट कृति के मूल लेखक और इसके रचना काल का कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं हो सका है, जिस पर आगे शोध की आवश्यकता है।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ डिजिटल अपलोड

दुर्लभ पाण्डुलिपियों के अवलोकन के दौरान नगर निगम आयुक्त डी.एन. कश्यप ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा, “यह मुहिम हमारी लुप्त होती प्राचीन ज्ञान-संपदा को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने का सबसे सशक्त माध्यम है।” इस दौरान संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल एवं जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। संयुक्त कलेक्टर श्रीमती अग्रवाल ने स्वयं रुचि लेते हुए पाण्डुलिपियों को डिजिटल रूप से पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी कराई। यह पूरा तकनीकी कार्य सर्वेयर गौरव पाठक द्वारा संपन्न कराया गया।

देशभर में 1 करोड़ से अधिक तो सरगुजा में 46 पाण्डुलिपियां दर्ज

अपलोडिंग के आंकड़ों की जानकारी देते हुए जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र ने बताया कि इस राष्ट्रीय अभियान (National Manuscript Mission) के तहत अब तक पूरे देश में एक करोड़ आठ लाख से अधिक प्राचीन पाण्डुलिपियों की जियो-टैगिंग और दस्तावेजीकरण का काम पूरा किया जा चुका है।

वहीं, अकेले सरगुजा जिले में अब तक 13 अलग-अलग संरक्षकों को चिन्हित कर उनके पास सुरक्षित रखी 46 दुर्लभ पाण्डुलिपियों को केंद्र सरकार के ‘ज्ञानभारतम’ पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड कर डिजिटल रूप से हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया गया है।

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