baton baton main : नर्क में स्वागत है, दाऊ की चुटकी, तेरा तुझको अर्पण..

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सुकांत राजपूत

नर्क में स्वागत है…

baton baton main : फोर्स में जब तक बैरक में हैं तब तक स्वर्ग है, सर्चिंग में मीलों पैदल चलने के बाद ही नर्क का ऐहसास होने लगता है। हालाकि निर्भीक जवानों के लिए नर्क और स्वर्ग क्या उसे तो अपना कर्तव्य निभाना है।

लेकिन एसटीएफ का एक आला अधिकारी ऐसा है कि उसे अपना घर भी नर्क लगता है। शायद, इसलिए भिलाई के सरकारी बंगले में साहब ने प्रवेश व्दार में ही मोटे अक्षरों में लिखवाया है…वेलक टू हेल..! एसटीएफ के साहब यूं तो आर्मी रिटर्न हैं और डील-डौल में भी यम जैसा ही है।

मुफ्त सेवा में भी गजब का जज्बा तो तारीफ के काबिल है ही, उनकी खान-पान की भी मातहतों में काफी चर्चा है। उस पर उनकी बड़ी सी मुंडी, चौड़े-चौड़े पंजों और बिना माईक के भी बुलंद आवाज से महकमें के लोगों की रूहें कांप उठती हैं। (baton baton main)

ऐसे व्यक्तित्व के धनी एसटीएफ के आला साहब के घर में दिन को तो लोग चल भी देते हैं, लेकिन रात को दरवाजे पर लिखी वेलकम टू हेल वाली ईबारत और अंधेरे में डूबे बंगले में रात को कोई नहीं जाना चाहता।

दाऊ की चुटकी…

दाऊ जी का मिजाज ही कुछ नारियल जैसा है। बाहर से सख्त और अंदर से रसीले, गुदेदार और स्वादिष्ट। खैर, जिसने उन्हें चखा है ये बखान उनके लिए नहीं है, हम तो उन्हें बताना चाहते हैं जो महज चुटकी लेने पर ही दाऊ जी का आशय यूं समझाने लगे थे कि मानों उनकी रग-रग से वाकिफ हों! बात चंद रोज पहले राजीव भवन में एक सभा की है। (baton baton main)

जब सीएम बोलने उठे तो माईक गड़बड़ाने लगा। कुछ और भी कमियों और खामियों के बाद यूं माईक का साथ छोड़ देना वाकई चौंकाने वाली बात थी। बस फिर क्या था दाऊ जी ने अपने ही अंदाज में कह गए, उनकी आवाज दबाने की कोशिश हो रही है और संचार-मीडिया प्रभारी शायद दो पद नहीं सम्हाल पा रहे हैं।

दाऊ जी की महज इस चुटकी को चेतावनी समझने वालों ने हल्ला करना शुरु कर दिया…या तो अब पाठ्य पुस्तक का जिम्मा रहेगा या फिर कांग्रेस संगठन में संचार-मीडिया का..! दाऊ जी को हम जितना जानते हैं उससे तो यह महज चुटकी लगी पर अब वे कुछ बदल गए हों तो कहा नहीं जा सकता है।

तेरा तुझको अर्पण…

तेरा जुझकों अर्पण, क्या लागे मेरा के उलट तेरा मुझको अर्पण अब क्यों लौटाउं तेरा वाली लाइन कही जा रही है। (baton baton main) एक विभाग के सेक्रेटरी के घर इन दिनों एडवांस वापिस मांगने के लिए ठेकेदारों की लंंबी लाइन लगी हुई है।

करोड़ों के ठेके की बंदरबांट के बाद काम अटक गया। कईयों की एडवांस पेमेंट अटक गई है। काम भी आला फरमान के बाद फिर से करने की तैयारी है। ऐसे में जिन्होंने काम के एवज में दाम चुकाया वो अब वेंटिलेटर में पहुंच गए हैं।

कुछ मजबूत इम्यूनिटी वाले ठेकेदार हैं जो अब महकमें के सचिव से सीधे पैसे लौटाने की गुजारिश कर रहे हैं। वजह साफ है, काम उन्हें मिल नहीं सकता वे जानते हैं इसलिए तो पैसा दिए थे अब जब काम नहीं तो दाम नहीं, लौटाना तो पड़ेगा ही। इधर चंडू खाने की खबर है कि बेचारे सेक्रेटरी ने तो कमिशन काटकर रकम आगे बढ़ा दी थी तो बकाया अमाउंट तो वहां फंसी है।

उमेश और मजबूत…

क्या सोचकर अपने उज्जवल प्रशासनिक भविष्य को सियासत के पैरों तले रौंद दिया ये सवाल आज भी भाजपा नेता ओपी चौधरी के चेहतों को सालता है। बातों ही बातों में एक समर्पित समर्थक मिल गया तो उसने नया राज खोला।

दुख की वजह पूछने पर उसने भारी मन से कहता चला गया, (baton baton main) बस…हो गया अब ओपी सर के लिए मुश्किल है, उमेश ने क्षेत्र में खुद को और मजबूत कर लिया है। हराना नामुमकिन है। पिता को जब जूदेव जैसे करिश्माई नेता ने नहीं हरा पाया तो फिर ज्यादा मजबूत हो चुके उमेश के खिलाफ किसी भाजपाई के लिए खड़ा होना भी हारने के समान है।

समर्थक ने यह भी कहा, साहब अगर अचानक की बजाए कई साल पहले यह तैयारी करते तो उम्मीद भी थी। अब तो एकमात्र विकल्प है उन्हें सीट बदलनी पड़ेगी।

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