baton baton main: मरवाही उपचुनाव, टिकट न मिले इसकी, देसी मुर्गी छुपानी..

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डॉक्टर वर्सेस डॉक्टर

baton baton main : मरवाही उपचुनाव के लिए सूबे की तीन सियासी पार्टियां अपना प्रत्याशी लगभग तय कर चुकी हैं। हालाकि औपचारिक घोषणा बाकि है फिर भी तीनों दलों कांग्रेस, भाजपा और छजकां उम्मीदवारों के नाम के आगे डॉक्टर लिखा है। जैसे कांग्रेस से डॉ.केके ध्रुव का नाम प्रबलता से लिया जा रहा है।

जबकि भाजपा से दो नाम समीरा पैकरा और डॉ. गंभीर दावेदार हैं। इसी तरह जोगी कांग्रेस से अमित की राह में कई रोड़े अटकाने की तैयारी है सो अमित की पत्नी डॉ.ऋचा जोगी भी विकल्प हैं। (baton baton main) ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि तीनों डॉक्टर लिखने के लिए इनटाईटल केंडिडेट्स अगर फाइनली उतरे तो मरवाही उपचुनाव डॉक्टर वर्सेस डॉक्टर का होगा। वैसे भाजपा-कांग्रेस से डॉक्टर ही उतरना तय है।

मरवाही की रणनीति

अजीत जोगी के निधन के बाद रिक्त हुई मरवाही विधानसभा सीट में दोस्त, दुश्मन और दरयाफ्त वाला नजारा है। (baton baton main) अमित का विकल्प ऋचा हैं पर दोनों को जाति मामले में उलझा दिया गया है। ऐसे में मरवाही में सीधी टक्कर कांग्रेस-भाजपा की होगी। कांग्रेस के लिए यह सीट फतह करना जितना जरूरी है उससे कहीं ज्यादा भाजपा-छजकां को हराना है।

छजकां भी इस सीट को खोना नहीं चाहती इसलिए दोस्त से दरयाफ्त कर ही अमित के बदले ऋचा को लाने के साथ ही समीरा पैकरा को टिकट न मिले इसकी बात हो चुकी है। क्योंकि महिला के खिलाफ अगर भाजपा से महिला को टिकट मिलती तो तय था परिणाम जातिगत और पूर्व में कम अंतर से हारी समीरा के हक में यह जाता। (baton baton main) फिर सियासत में यह होता ही है किसी भी दिग्गज के खिलाफ भले ही बेलगाम बयान दिए जाएं पर कोई दिग्गज नहीं उतारा जाता।

नॉन वेज की इंतहा

सूबे में यूं तो नॉन वेज आईएएस और आईपीएसों की कोई कमी नहीं। ये नॉन वेज वैसे वाले नहीं ऐसे वाले यानि की खाने वाले हैं। खैर, खाते तो ज्यादातर हैं लेकिन एक आईएएस में नॉन वेज की जुनूनी इंतहा है। (baton baton main) उनकी खुशकिस्मती कि वे अब एक छोटे से जिले के कलेक्टर बन गए हैं और बदकिस्मती उस सूबे के आदिवासियों की..उन्हें अब अपनी देसी मुर्गी छुपानी पड़ रही है।

देसी चिकन के बेहद शौकीन कलेक्टर के मातहत भी मुर्गा-मुर्गी खोज-खोज कर थक गए हैं। नॉन वेज कलेक्टर का यूं तामसिक भोजन करने का शौक पूरे जिले पर भारी पड़ रहा है। साहब का पेट भरा की नहीं यह तो पता नहीं पर बातों ही बातों में सूत्र के पुत्र ने बताया कलेक्टरी और चिकन साहब का पेशन है।

ड्रग्स लेने वाले गुम

कोई पहली बार रायपुर पुलिस ने ड्रग्स और तस्कर को नहीं पकड़ा है! इससे पूर्व भी सूटकेस भरके गर्दा व कोकिन मिला, तस्कर छूट गए मामला भी वक्त के साथ ठंडा पड़ गया। (baton baton main) यह पहला वाक्या है जब मामूली सी कीमत का चंद ग्राम ड्रग्स मिला और रायपुर पुलिस ने बाल की खाल उधेड़ते हुए 12 ड्रग पैडलर, हैंडलर और डीलर तक पहुंची।

जाहिर है माल की कीमत और तादात दोनों में ईजाफा हुआ। पुलिस भी खुद की पीठ थपथपाती थक नहीं रही। अब ड्रग देने वाले घेरे में आ गए जबकि नाईजीरियन तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है। बकाया हैं राजधानी के लेने वाले रईसजादे जो तस्करों के कॉल डिटेल और वॉट्सएप चैट में नामजद हैं। कप्तान साहब और उनके बहादुर 50 हजार के ईनामी दस्ते के जांबाज एक भी ड्रग एडिक्ट को बेनकाब नहीं कर पाए हैं।

बातों ही बातों में (baton baton main) सूत्र ने बताया दरअसल सभी रईसजादों की बिगड़ैल औलादें हैं। इसमें नवाबजादे भी हैं और नवाबजादियां भी किसी की शादी होने वाली है तो कोई पढ़ाई कर रहा है ज्यादातार लक्ष्मीपुत्र परिवार के हैं। मतलब साफ है बरामद माल, माल की कीमत से ज्यादा तो नाम की कीमत है।…समझ गए न!

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