Bamleshwari Temple : करोड़ों के चढ़ावे की कैसे होती है निगरानी, मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट ने बताई पूरी व्यवस्था
देशभर में धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर चर्चा के बीच डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर की व्यवस्था भी लोगों का ध्यान खींच (Bamleshwari Temple) रही है। यहां हर वर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन पूरी राशि तय प्रक्रिया और कड़ी निगरानी के साथ संभाली जाती है। मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि दान से जुड़ा हर चरण निर्धारित नियमों के अनुसार पूरा किया जाता है।
श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रमुख शक्तिपीठ में दान राशि से लेकर आभूषणों तक का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है। ट्रस्ट का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक प्रक्रिया में निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
हर साल आता है करीब 17.50 करोड़ रुपये का चढ़ावा Bamleshwari Temple
वर्ष 1964 से मंदिर का संचालन कर रहे मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर ट्रस्ट के अनुसार मंदिर में हर वर्ष लगभग 17.50 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। सबसे अधिक दान चैत्र और क्वांर नवरात्र के दौरान मिलता है। दोनों नवरात्र में औसतन ढाई ढाई करोड़ रुपये श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित किए जाते हैं।
दान पेटी से बैंक तक तय प्रक्रिया
ट्रस्ट के अनुसार दान पेटियां निर्धारित अंतराल पर ट्रस्टियों की मौजूदगी में खोली जाती हैं। पेटियों से निकली राशि को सीलबंद पेटियों में रखकर सीधे स्ट्रांग रूम पहुंचाया जाता है। इसके बाद अधिकतम आठ दिनों के भीतर ट्रस्ट कर्मचारियों और चयनित सदस्यों की टीम ट्रस्टियों की उपस्थिति में राशि की गिनती करती है। पूरी प्रक्रिया स्ट्रांग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है। गणना पूरी होने के बाद राशि तत्काल बैंक में जमा करा दी जाती है।
आभूषणों की भी रहती है विशेष सुरक्षा
मंदिर में नकद दान के साथ श्रद्धालु सोने और चांदी के आभूषण भी अर्पित करते हैं। ट्रस्ट के अनुसार प्रत्येक आभूषण की पहले रसीद बनाई जाती है। इसके बाद उन्हें सुरक्षित लॉकर में रखा (Bamleshwari Temple) जाता है। प्रमुख पर्वों और विशेष अवसरों पर माता के श्रृंगार के लिए इन्हें बाहर निकाला जाता है और उपयोग के बाद फिर सुरक्षित लॉकर में रख दिया जाता है।
ट्रस्ट के अधीन हैं कई मंदिर
पहाड़ स्थित मुख्य मां बम्लेश्वरी मंदिर के अलावा तलहटी में स्थित छोटी मां बम्लेश्वरी मंदिर, मां शीतला मंदिर और पहाड़ी पर स्थित अन्य मंदिर भी ट्रस्ट के अधीन संचालित होते हैं। ट्रस्ट में 27 पुजारियों सहित लगभग 350 कर्मचारी कार्यरत हैं। मंदिर की आय में दुकानों का किराया, विज्ञापन और रोपवे भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं।



