उच्च शिक्षा औऱ तकनीकी शिक्षा विभाग के बीच समन्वय के अभाव का खामियाजा भुगत रहे हैं लगभग 2 लाख विद्यार्थी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालयों एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण को लेकर उच्च शिक्षा विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति (AFRC) तथा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग (PURC) के बीच जारी असमंजस एवं परस्पर विरोधी कार्यवाहियों से प्रदेश के लगभग 2 लाख विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं। विभागीय स्तर पर स्पष्ट नीति के अभाव और अधिकार-क्षेत्र की खींचतान के कारण प्रवेश प्रक्रिया एवं शुल्क निर्धारण को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
दिनांक 09 जून 2026 को संचालक, तकनीकी शिक्षा (DTE) द्वारा प्रदेश के समस्त निजी शिक्षण संस्थानों, जिनमें निजी विश्वविद्यालय भी शामिल हैं, को पत्र जारी कर छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क का निर्धारण) अधिनियम, 2008 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य शासन द्वारा आयोजित सामान्य प्रवेश प्रक्रिया के अंतर्गत तैयार एकल मेरिट सूची के आधार पर ही प्रवेश प्रदान किए जाएं, जिससे पारदर्शिता, समान अवसर एवं गुणवत्तापूर्ण प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
इसके ठीक विपरीत, 06 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग (PURC) ने सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को पत्र प्रेषित कर 03 जुलाई 2026 को मंत्रालय में आयोजित बैठक का हवाला देते हुए AFRC अधिनियम, 2008 में संशोधन की आवश्यकता पर बल दिया। आयोग ने वर्तमान अधिनियम में परिवर्तन कर निजी विश्वविद्यालयों के लिए अलग व्यवस्था बनाने की वकालत की, जिससे पहले से लागू कानूनी व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया।
इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ तब लिया, जब 28 जुलाई 2026 को उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव द्वारा सचिव, तकनीकी शिक्षा विभाग को पत्र भेजते हुए AFRC अधिनियम, 2008 में संशोधन का प्रारूप हिन्दी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रेषित किया गया। इससे यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब अधिनियम का प्रशासनिक क्रियान्वयन तकनीकी शिक्षा विभाग एवं AFRC के अधिकार क्षेत्र में है, तब उसके संशोधन की पहल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा क्यों और किस अधिकार के तहत की जा रही है?
वर्तमान स्थिति यह प्रतीत कराती है कि एक ओर तकनीकी शिक्षा विभाग अपने अधिनियम एवं नियमों के पालन पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा विभाग उसी अधिनियम में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप दोनों विभागों एवं AFRC तथा PURC के बीच अधिकार-क्षेत्र को लेकर भ्रम एवं टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
अगस्त माह का आधा समय बीत जाने के बावजूद अभी तक इस विवाद का कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है। आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि इन दोनों विभागों के राजनीतिक मुखिया माननीय श्री टंकराम वर्मा एवं माननीय श्री गुरु खुशवंत साहेब के संज्ञान में भी यदि यह पूरा घटनाक्रम नहीं है, तो यह प्रशासनिक समन्वय की गंभीर कमी को दर्शाता है।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के वे लगभग 2 लाख विद्यार्थी उठा रहे हैं, जो विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में मेरिट के आधार पर, पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से तथा उचित एवं विनियमित शुल्क पर प्रवेश प्राप्त करना चाहते हैं। विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के हित में आवश्यक है कि राज्य शासन शीघ्र स्पष्ट नीति अपनाकर विभागों के बीच समन्वय स्थापित करे तथा प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण संबंधी भ्रम की स्थिति को तत्काल समाप्त करे।



