Alok Nath : मीटू विवाद के बीच आलोक नाथ पर बोलीं नारायणी शास्त्री, कहा- हमारे साथ हमेशा सम्मान से पेश आए
मीटू आंदोलन के दौरान लगे आरोपों के बाद लंबे समय से अभिनय की दुनिया से दूर (Alok Nath) चल रहे अभिनेता आलोक नाथ एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह टीवी अभिनेत्री नारायणी शास्त्री का बयान है। उन्होंने एक इंटरव्यू में आलोक नाथ के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके साथ काम के दौरान अभिनेता ने हमेशा सम्मानजनक व्यवहार किया।
हालांकि नारायणी शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह केवल अपना व्यक्तिगत अनुभव बता रही हैं और दूसरों के आरोपों या घटनाओं पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि किसी मामले का सच अदालत और जांच के आधार पर ही तय होना चाहिए।

2018 में लगे थे मीटू के आरोप Alok Nath
साल 2018 में मीटू आंदोलन के दौरान निर्माता विनीता नंदा और अभिनेत्री नवनीत निशान समेत कई महिलाओं ने आलोक नाथ पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था। जनवरी 2019 में अदालत से उन्हें जमानत मिली थी। आलोक नाथ ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए बाद में मानहानि का मामला भी दायर किया था।
नारायणी शास्त्री ने क्या कहा
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान नारायणी शास्त्री ने कहा कि मीटू आंदोलन समय के साथ धीमा पड़ गया। उनके मुताबिक, जिन लोगों पर आरोप लगे थे उनमें से कई फिर से अपने काम पर लौट आए, जबकि कई मामलों में न तो आरोप साबित हुए और न ही संबंधित लोग पूरी तरह निर्दोष घोषित हुए। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी लहर थी जो आई और समय के साथ खत्म होती चली गई।
आलोक नाथ के साथ साझा किया अपना अनुभव Alok Nath
नारायणी शास्त्री ने बताया कि उन्होंने करीब साढ़े चार वर्षों तक आलोक नाथ के साथ काम किया और इस दौरान उन्हें कभी भी अभिनेता का व्यवहार असम्मानजनक नहीं लगा।
उन्होंने कहा कि आलोक नाथ सेट पर सभी के साथ सम्मान से पेश आते थे। उन्होंने यह भी बताया कि अभिनेता कभी-कभी शराब का सेवन करते थे, लेकिन उनके अनुसार उस दौरान भी उन्होंने उनके साथ या सेट पर किसी के साथ अभद्र व्यवहार नहीं किया।
आरोपों पर कही यह बात
नारायणी शास्त्री ने कहा कि वह केवल अपने अनुभव के आधार पर बात कर (Alok Nath) सकती हैं। उन्होंने कहा कि कई वर्ष पहले किसी अन्य व्यक्ति के साथ क्या हुआ, इसकी उन्हें व्यक्तिगत जानकारी नहीं है और वह सुनी-सुनाई बातों के आधार पर कोई निष्कर्ष (Alok Nath) नहीं निकालना चाहतीं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मामले में दोषी या निर्दोष होने का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।



