प्रसंगवश: विमर्श युद्ध

यशवंत धोटे
इस शीर्षक से चौकने की जरूरत नहीं हैं क्योकि इसे हम अंग्रेजी में ‘नरेटिव वार’ कहते हैं। इसके परिणाम दूरगामी होते है लेकिन अस्थाई होते है जो देश ‘काल परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तनशील होते हैं। अभी देश में विमर्श युद्ध चल रहा हैं और पूरी दुनिया की बात करे तो इरान’ इजराईल और अमरीका के बीच चल रहे युद्ध का सीज फायर काल चल रहा है। कल दिन भर देश की संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर चली बहस के बाद दो तिहाई बहुमत के अभाव में यह बिल गिर गया। यह भाजपानीत एनडीए सरकार के 12 वर्षीय संसदीय इतिहास में पहली बार हुआ या होने दिया गया।
ताकि नरेटिव बिल्डिंग की बुनियाद मजबूत हो। भाजपा का फ्लोर मैनेजमेन्ट ग्रुप जानता था कि दो तिहाई बहुमत के अभाव में यह विधेयक गिरेगा सो इससे आगे के विमर्श युद्ध की तैयारी की गई, जो सदन के स्थगित होने के बाद भाजपा की महिला संासदों के प्रदर्शन के रूप में दिखी भी। हालांकि यह बात समूचा विपक्ष भी जानता था कि भाजपा इस बिल के मार्फत नया विमर्श युद्ध छेडऩे जा रही है। सो उनकी अपनी तैयारी भी है। आने वाले 23 और 26 अप्रैल को होने वाले बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों में इस विमर्श युद्ध को लड़ा जाएगा और विपक्ष भी इस विमर्श का जवाब देगा। दरअसल यह विधेयक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ के रूप में संसद के दोनों सदनों से दो तिहाइ बहुमत से पास हो चुका हैं।
विपक्षी मांग थी कि उसे 2024 के आम चुनाव से लागू किया जाय। लेकिन भाजपा का थिंक टैंक इससे आगे के विमर्श युद्ध की तैयारी कर रहा था। इस तैयारी की एक बानगी संसद के नए भवन में 880 सांसदों के बैठने की व्यवस्था के रूप में देखी जा सकती हैं। ठीक उसी तरह जैसे छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन में 120 विधायकों के बैठने की व्यवस्था की गई है जबकि राज्य की 90 विधानसभा सीटें है। विपक्ष का आरोप है कि कल जो बिल संसद में गिरा वह 131वां संविधान संशोधन (परिसिमन) बिल 2026 था। उसमें महिला आरक्षण को लेकर कोई उल्लेख ही नहीं था। विपक्षी तर्को को यदि माने तो 16 अप्रैल 2026 की रात जारी एक अधिसूचना के मुताबिक 2023 का महिला आरक्षण बिल आज की तारीख में लागू है।
बहरहाल आज का हमारा प्रसंगवश विमर्श युद्ध पर केन्द्रित है। यह युद्ध कितने बड़े केनवास पर लड़ा जा सकता है यह संसद की दो दिन की बहस के बाद पता चलता हैं। देश में जातिगत जनगणना चल रही हैं। इसी के बाद परिसीमन भी होना है जिसमें स्वाभाविक तौर पर निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या बढऩी हैं। लेकिन संसद में यह विधेयक गिरने के बाद भाजपा के देश भर के कार्यकर्ताओं और खासकर महिलाओं को ब्लू प्रिन्ट दे दिया गया है कि महिला आरक्षण बिल का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं का कितना नुुकसान किया हैं यह देश की जनता को बताना है। यह विमर्श युद्ध भाजपा के अन्य मुददो की तरह चलता रहेगा और विपक्ष सत्तापक्ष के साथ इस इस विमर्श युद्ध को भी लड़ता रहेगा।



