संपादकीय: इसे कहते हैं असली जेन-जी का आंदोलन
हाल ही में देश ने राजधानी नई दिल्ली में तथाकथित जेन-जी का आंदोलन देखा था। कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में जंतर मंतर पर एक माह तक चले इस आंदोलन से जेन-जी कम जुड़े थे उनसे ज्यादा तो आपराधिक पृष्टभूमि वाले असमाजिक तत्व जुड़े थे जिन्होंने वहां क्या किया यह किसी से छिपा नहीं है। वहीं दूसरी ओर झारखंड है जिसकी राजधानी रांची के चैपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के अंदर पिछले 12 दिनों से हजारों छात्र शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। न तो वहां बिरयानी बट रही है और न ही आंदोलनरत छात्रों के लिए बांग्लादेश या खाड़ी देशों से थोक के भाव में पिज्जा बर्गर आ रहे हैं।
ये छात्र गुण चिवड़ा खाकर वहां डंटे हुए हैं और अब जब उनकी संख्या हजारों में पहुंच गई है तो रांची के मंदिरों से इन छात्रों के लिए भंडारे का प्रसाद चावल दाल और आलू की सब्जि के रूप में भेजा जा रहा है। झारखंड में हुए पेपरलीक के मामले के खिलाफ आंदोलनरत इन छात्रों को भी एक सोनम वांगचूक की मिल गया है। देवेन्द्र महतो नाम के छात्र नेता ने आमरण अनसन शुरू किया है। वहीं चार छात्र भूख हडताल पर बैठ गये हैं किन्तु इस आंदोलन के दौरान न तो देश विरोधी नारे लग रहे हैं न ही कोई गंदी गालियां दे रहा है।
झारखंड के छात्रों इस आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने जुबानी समर्थन दिया है और कहा है कि जरूरत पडऩे पर वे अपनी टीम के साथ रांची जाएंगे। उनके इस बयान के साथ रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अभीजित दीपके को रांची आने की कोई जरूरत नहीं है। हम अपनी लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से लड़ लेंगे। हम नहीं चाहते की यहां भी देश विरोधी नारे लगाये जायें और प्रमुख संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को गंदी गालियां दी जाये।
वाकई इसे कहते हैं असली जेन-जी का आंदोलन। जिसे अब झारखंड के लोगों का भी भारी समर्थन मिल रहा है और झारखंड सरकार पर दबाव भी बढ़ रहा है। वहां के पेपरलीक माले की सीआईडी जांच के आदेश जारी कर दिये गये हैं और 14 लोगों की गिरफ्तारी भी हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगो पर सरकार विचार करेगी और जल्द ही छात्रों से इस बारे में चर्चा की जाएगी।



