मध्यप्रदेश

Vulture Conservation : घायल हालत से अंतर्राष्ट्रीय सफर तक, मध्यप्रदेश के गिद्ध ने सबको चौंकाया

मध्यप्रदेश में वन्य जीव संरक्षण को लेकर इन दिनों अलग ही चर्चा दिखाई दे रही है। भोपाल और रायसेन के वन क्षेत्रों में काम कर रहे विशेषज्ञों के बीच एक गिद्ध की लंबी उड़ान लोगों की जिज्ञासा का बड़ा कारण बनी हुई है। जंगल और पक्षी संरक्षण से जुड़े लोग इसे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। खासतौर पर हलाली बांध क्षेत्र में इस गिद्ध को छोड़ने के बाद उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

वन विभाग और संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर उत्साह है कि घायल हालत में मिला एक दुर्लभ गिद्ध अब हजारों किलोमीटर की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा पूरी कर चुका है। स्थानीय लोगों के बीच भी इसकी चर्चा हो रही है। कई वन्य जीव प्रेमी इसे प्रदेश के संरक्षण मॉडल की बड़ी सफलता के तौर पर देख रहे हैं।

घायल हालत में मिला था दुर्लभ गिद्ध : Vulture Conservation

दुर्लभ सिनेरियस गिद्ध को 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज इलाके से बचाया गया था। उस समय यह घायल और काफी कमजोर हालत में मिला था। इसके बाद इसे उपचार के लिए भोपाल लाया गया।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान और बीएनएचएस के संयुक्त प्रयासों से केरवा स्थित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर में विशेषज्ञों ने इसका इलाज किया। लंबे उपचार और देखभाल के बाद इसकी स्थिति में सुधार आया।

हलाली बांध में छोड़ा गया था

स्वस्थ होने के बाद 23 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इसे रायसेन जिले के हलाली बांध क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण के बीच मुक्त (Vulture Conservation) किया था। छोड़ने के बाद यह करीब एक महीने तक उसी इलाके में रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान गिद्ध ने खुद को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार दोबारा ढालना शुरू किया। उसकी गतिविधियों पर लगातार वैज्ञानिक तरीके से निगरानी रखी गई।

जीपीएस से होती रही निगरानी

वन विहार की टीम ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और बीएनएचएस के सहयोग से इस गिद्ध की जीपीएस ट्रैकिंग शुरू की। इसके जरिए उसके प्रवास और उड़ान की दिशा पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

ट्रैकिंग में सामने आया कि 10 अप्रैल 2026 को गिद्ध ने हलाली बांध से लंबी यात्रा शुरू की। इसके बाद वह राजस्थान की तरफ बढ़ा और फिर पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान की सीमाएं पार करता हुआ आगे निकल गया।

उज्बेकिस्तान तक भरी लंबी उड़ान

जानकारी के अनुसार यह गिद्ध 4 मई 2026 को उज्बेकिस्तान (Vulture Conservation) पहुंच गया। इस पूरी यात्रा में उसने 3000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की। वन्य जीव विशेषज्ञ इसे गिद्धों की अद्भुत दिशा पहचान क्षमता और मजबूत सहनशक्ति का बड़ा उदाहरण मान रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी लंबी उड़ान यह दिखाती है कि सही उपचार और सुरक्षित वातावरण मिलने पर दुर्लभ पक्षी फिर से सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।

संरक्षण के क्षेत्र में बढ़ी पहचान

प्रदेश सरकार का कहना है कि वन्य जीव संरक्षण के लिए लगातार आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपचार केंद्रों, निगरानी व्यवस्था और विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से संरक्षण कार्यों को मजबूत किया गया है।

गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की वजह से अब मध्यप्रदेश देश ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान (Vulture Conservation) बना रहा है। वन्य जीव संरक्षण से जुड़े कई विशेषज्ञ इसे भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

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