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Labour Code : सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम पर अब देना होगा अतिरिक्त भुगतान, नए श्रम नियमों से बदलेगा कर्मचारियों का हाल

देशभर में कामकाज के घंटों को लेकर पिछले कई दिनों से चर्चा तेज (Labour Code) थी। दफ्तरों से लेकर फैक्ट्रियों तक कर्मचारियों के बीच यही सवाल घूम रहा था कि आखिर नए श्रम नियमों में क्या बदलाव होने वाले हैं। कई जगहों पर कर्मचारी संगठनों और श्रमिकों के बीच बैठकों का दौर भी चलता रहा। अब केंद्र सरकार की ओर से जारी नए नियमों ने इस बहस को और गर्म कर दिया है।

कारखानों और सरकारी हिस्सेदारी वाले बड़े प्रतिष्ठानों में इस फैसले को लेकर अलग अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ कर्मचारी इसे राहत वाला कदम बता रहे हैं तो कुछ लोग लंबे समय तक काम कराने वाले सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। खासतौर पर अतिरिक्त काम के बदले दोगुना भुगतान वाले नियम ने श्रमिकों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है।

साप्ताहिक काम की सीमा तय : Labour Code

केंद्र सरकार ने नए श्रम नियमों के तहत एक सप्ताह में 48 घंटे काम की सीमा तय कर दी है। यदि किसी श्रमिक से इससे अधिक समय तक काम लिया जाता है तो उसे अतिरिक्त भुगतान देना अनिवार्य होगा। नियमों के अनुसार ओवरटाइम की स्थिति में प्रति घंटे की मजदूरी का दोगुना भुगतान किया जाएगा।

करीब पांच साल के लंबे इंतजार के बाद सरकार ने चारों श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। हाल ही में नियमों को प्रकाशित किया गया, जिसके बाद इन्हें प्रभावी माना गया। इससे पहले सरकार ने मसौदा जारी कर विभिन्न पक्षों से सुझाव भी मांगे थे।

न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा पर जोर (Labour Code)

नई व्यवस्था में सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं। मजदूरी संहिता के तहत केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी तय करने का अधिकार मिला है। साथ ही समय पर वेतन भुगतान के तरीकों को भी स्पष्ट किया गया है।

संविदा कर्मचारियों के मामले में भी बड़ा बदलाव किया गया है। यदि बोनस भुगतान में गड़बड़ी होती है तो इसकी जिम्मेदारी केवल ठेकेदार पर नहीं बल्कि मुख्य नियोक्ता पर भी होगी। इसके अलावा महंगाई भत्ते को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर साल में दो बार संशोधित करने की बात कही गई है।

पुराने कानूनों को मिलाकर बनाई गई नई व्यवस्था

मौजूदा 29 श्रम कानूनों को मिलाकर चार बड़ी श्रम संहिताएं तैयार की गई हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही दिक्कतों को कम करना और पूरी व्यवस्था को ज्यादा आधुनिक बनाना है।

नए ढांचे में व्यापार करने में आसानी बढ़ाने, रोजगार के अवसर तैयार करने और श्रमिकों की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही वेतन सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को भी प्रमुख आधार बनाया गया है।

नौकरी जाने पर कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था

नए नियमों में राष्ट्रीय कौशल विकास कोष बनाने का भी प्रावधान रखा गया है। इसका इस्तेमाल उन श्रमिकों को प्रशिक्षण देने में किया जाएगा जिनकी नौकरी छूट जाती है। सरकार का मानना है कि इससे श्रमिकों को दोबारा रोजगार पाने में मदद मिल सकेगी।

इन चार श्रम संहिताओं को किया गया लागू

सरकार ने जिन चार श्रम संहिताओं को लागू किया है उनमें मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता 2020 शामिल हैं। ये सभी नियम 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माने गए हैं।

किन कर्मचारियों को ज्यादा फायदा मिलेगा

विशेषज्ञों के मुताबिक इन नियमों का सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों में देखने को मिलेगा जहां केंद्र सरकार की बड़ी भागीदारी (Labour Code) है। इनमें दूरसंचार, बैंकिंग, बीमा, खनन, तेल क्षेत्र, प्रमुख बंदरगाह, हवाई परिवहन और सार्वजनिक उपक्रम शामिल हैं। इनके साथ जुड़े ठेका श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

राज्यों को भी बनाने होंगे अपने नियम

केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद अब राज्यों को भी अपने स्तर पर नियम लागू करने होंगे। बताया जा रहा है कि ज्यादातर राज्यों ने इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है। पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य माना जा रहा था जहां यह प्रक्रिया लंबित थी, लेकिन नई सरकार बनने के बाद वहां भी नियम लागू होने की संभावना जताई जा रही है।

नियुक्ति पत्र और स्वास्थ्य जांच पर भी जोर

नई श्रम संहिताओं में कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के श्रमिकों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच का भी प्रावधान रखा गया है। अलग अलग शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के लिए समान काम और समान वेतन सुनिश्चित करने की बात भी नियमों में शामिल है।

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