
देश की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने जिस तरह नए चेहरों को आगे (BJP CM) बढ़ाया है, उसने कई राज्यों की सत्ता की तस्वीर बदल दी है। पार्टी के अंदर लंबे समय से संगठन में काम कर रहे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाकर नई राजनीतिक लाइन तैयार की गई। अब बंगाल में सरकार बनने के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि भाजपा लगातार नए और क्षेत्रीय चेहरों पर दांव लगा रही है।
दिल्ली से लेकर राज्यों तक राजनीतिक गलियारों में इस रणनीति को लेकर चर्चा हो रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि युवा और संगठन से जुड़े नेताओं को आगे लाने का फायदा भाजपा को लगातार चुनावों में मिला है। खासतौर पर उन राज्यों में जहां पहले पार्टी कमजोर मानी जाती थी, वहां नए चेहरों के जरिए मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश साफ दिखाई दी।
हरियाणा और महाराष्ट्र से शुरू हुआ सिलसिला : BJP CM
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 में सत्ता संभालने के बाद पहली बार हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा ने नए नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया। हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।
वहीं महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। बाद में सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई गई। यहीं से राज्यों में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का दौर तेज हुआ।
पूर्वोत्तर में बढ़ा भाजपा का विस्तार
इसके बाद भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों में तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत की। 2016 में असम में पार्टी ने पहली बार सरकार बनाई और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद पार्टी लगातार राज्य में चुनाव जीतती रही।
उसी वर्ष अरुणाचल प्रदेश में भी भाजपा की सरकार (BJP CM) बनी। राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पेमा खांडू अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा खेमे में आए और राज्य में पहली बार पार्टी का स्पष्ट बहुमत बना।
मणिपुर और त्रिपुरा में भी बदली सत्ता
2017 में भाजपा ने मणिपुर में गठबंधन के सहारे सरकार बनाई। एन बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई। पार्टी ने क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर सत्ता हासिल की।
इसके एक साल बाद त्रिपुरा में भाजपा ने लंबे समय से चली आ रही वामपंथी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। बिप्लब कुमार देब के नेतृत्व में पार्टी ने वहां पहली बार सरकार बनाई। इस जीत को भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना गया।
ओडिशा में टूटा लंबे शासन का रिकॉर्ड
ओडिशा में 2024 के चुनाव में भाजपा ने बड़ा उलटफेर किया। पार्टी ने नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। इसके बाद मोहन चरण माझी को मुख्यमंत्री बनाया गया।
राज्य में इससे पहले बीजद लगातार 24 साल तक सत्ता में रही थी। भाजपा की इस जीत ने पूर्वी भारत की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया।
बिहार और बंगाल में भी नए चेहरे आगे
बिहार में लंबे समय तक भाजपा गठबंधन सरकार का हिस्सा रही, लेकिन मुख्यमंत्री पद पार्टी के पास नहीं था। बाद में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। यह राज्य में भाजपा का पहला मुख्यमंत्री चेहरा बना।
वहीं बंगाल में हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज (BJP CM) की। पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन को समाप्त करते हुए पहली बार सरकार बनाई। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
नए नेतृत्व पर भरोसा दिखा रही पार्टी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब राज्यों में स्थानीय और मेहनती नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर लगातार काम कर रही है। पार्टी संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में सक्रिय चेहरों को प्रमुख भूमिका देकर क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के जरिए भाजपा उन राज्यों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रही है, जहां कभी उसका प्रभाव सीमित माना जाता था।



