Urea Distribution : खरीफ सीजन में किसानों को बड़ी राहत, अब पिछले साल जितना मिलेगा यूरिया, खत्म हुई 80 प्रतिशत की सीमा
खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने (Urea Distribution) आई है। राज्य सरकार ने यूरिया वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पहले लागू 80 प्रतिशत की सीमा को समाप्त कर दिया है। अब किसानों को पिछले खरीफ सीजन में मिली यूरिया की मात्रा के बराबर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य खेती के दौरान किसानों को उर्वरक की कमी से बचाना और समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को भी वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अब पिछले वर्ष के बराबर मिलेगा यूरिया Urea Distribution
नई व्यवस्था के तहत किसानों को खरीफ 2025 में जितनी मात्रा में यूरिया मिला था, खरीफ 2026 में भी उतनी ही मात्रा उपलब्ध कराई जाएगी। पहले लागू 80 प्रतिशत वितरण सीमा को समाप्त कर दिया गया है, जिससे किसानों को पूरी पात्रता के अनुसार यूरिया मिल सकेगा।
स्टॉक आने पर मिलेगी शेष मात्रा
जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने दुलदुला स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति का निरीक्षण करते हुए बताया कि यदि किसी समय समिति में स्टॉक कम होने के कारण पूरी मात्रा नहीं मिल पाती है, तो नया स्टॉक आते ही बची हुई यूरिया किसानों को उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को उर्वरक की कमी नहीं होने दी जाएगी।
खाद, बीज और कृषि ऋण पर भी जोर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सहकारी समिति में खाद और बीज की उपलब्धता, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से दिए जा रहे कृषि ऋण और अन्य सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज और कृषि ऋण समय पर उपलब्ध कराया जाए तथा किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।
किसानों से किया सीधा संवाद
कलेक्टर ने समिति पहुंचे किसानों से बातचीत कर खेती की तैयारियों, उर्वरकों की उपलब्धता और कृषि संबंधी समस्याओं की जानकारी (Urea Distribution) ली। साथ ही अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी अपनाने की अपील
कलेक्टर ने किसानों से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन उर्वरकों से फसलों को संतुलित पोषण मिलता है, लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है। उन्होंने आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और आय बढ़ाने पर भी जोर दिया।



