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UPSC Success : फिल्मी दुनिया छोड़ बेटे ने चुना संघर्ष का रास्ता, रात में नौकरी और दिन में पढ़ाई कर हासिल किया बड़ा मुकाम

फिल्मी दुनिया से जुड़े परिवारों के बच्चों को अक्सर आसान और तैयार रास्ता (UPSC Success) मिल जाता है। बड़े सितारों के घर में पले बढ़े कई चेहरे अभिनय या मनोरंजन की दुनिया में उतर जाते हैं, लेकिन एक स्टारकिड ने इससे बिल्कुल अलग राह चुनकर लोगों को हैरान कर दिया। आराम और शोहरत की जिंदगी छोड़ उन्होंने मेहनत और अनुशासन का रास्ता अपनाया।

उनकी कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। लोग इस बात की तारीफ कर रहे हैं कि सुपरस्टार पिता का नाम होने के बावजूद उन्होंने कभी उसका सहारा नहीं लिया। रात में नौकरी और दिन में घंटों पढ़ाई कर उन्होंने वह परीक्षा पास की जिसे देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है।

दिग्गज अभिनेता के बेटे हैं श्रुतंजय : UPSC Success

श्रुतंजय नारायणन तमिल सिनेमा के चर्चित हास्य अभिनेता चिन्नी जयंत के बेटे हैं। चिन्नी जयंत ने कई बड़ी फिल्मों में अपनी कॉमिक अदायगी से अलग पहचान बनाई थी। खास तौर पर रजनीकांत के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को काफी पसंद आती थी।

फिल्मी माहौल में बड़े होने के बावजूद श्रुतंजय का झुकाव अभिनय की तरफ नहीं गया। उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर लोगों के लिए काम करने का था।

पढ़ाई को बनाया सबसे बड़ी ताकत

श्रुतंजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद गुइंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने अशोका यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई भी पूरी की।

सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए खुद संघर्ष का रास्ता चुना। वे एक स्टार्टअप में नाइट शिफ्ट में नौकरी करते थे और दिन में कई घंटों तक खुद पढ़ाई करते थे।

दूसरे प्रयास में हासिल की बड़ी सफलता (UPSC Success)

लगातार मेहनत और अनुशासन का असर उनकी तैयारी में साफ दिखाई दिया। साल 2015 में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 75 हासिल की। उन्होंने समाजशास्त्र विषय को वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना था। दूसरे ही प्रयास में मिली इस सफलता ने उन्हें देशभर में चर्चा का विषय बना दिया।

प्रशासनिक सेवा में निभा रहे जिम्मेदारी

आज श्रुतंजय नारायणन तमिलनाडु कैडर के अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं (UPSC Success) दे रहे हैं। अलग अलग जिलों में जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने कई सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। तिरुप्पुर में सब कलेक्टर और विल्लुपुरम में अतिरिक्त कलेक्टर जैसे पदों पर काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

लोगों को दे रहे नई प्रेरणा

श्रुतंजय की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने यह साबित किया कि मेहनत और धैर्य के दम पर कोई भी व्यक्ति अपनी अलग पहचान बना सकता है। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध छोड़कर जनसेवा का रास्ता चुनने का उनका फैसला अब खूब सराहा जा रहा है।

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