छत्तीसगढ़

Digital Governance : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन को लेकर ऐसा क्या बदल दिया, अब गांव गांव में हो रही चर्चा

रायपुर में इन दिनों सरकारी कामकाज को लेकर लोगों के बीच अलग तरह की चर्चा सुनाई (Digital Governance) दे रही है। गांवों से लेकर शहर तक लोग इस बात पर बात कर रहे हैं कि अब छोटे छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर पहले जैसे नहीं लगाने पड़ रहे। कई जगहों पर लोग ऑनलाइन सुविधा और समय पर हो रहे काम को लेकर राहत महसूस कर रहे हैं। खासकर किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों में इसे लेकर हलचल ज्यादा दिखाई दे रही है।

सुशासन तिहार शुरू होने से पहले ही प्रशासनिक मशीनरी जिस तेजी से जमीन से जुड़े मामलों और प्रमाण पत्रों के काम निपटाने में लगी है, उसने लोगों का ध्यान खींचा है। सरकारी दफ्तरों में लंबित मामलों को तेजी से पूरा करने का दबाव भी दिख रहा है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अगुवाई में अब पूरा जोर इस बात पर है कि आम आदमी को जरूरी सेवाएं तय समय में मिलें और किसानों के काम बिना देरी पूरे हों।

किसानों और आम लोगों पर खास ध्यान : Digital Governance

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बेहद जरूरी माने जाते हैं। इसके अलावा किसानों के लिए सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे जैसे काम सबसे अहम जरूरतों में शामिल हैं। सरकार अब इन्हीं मामलों को प्राथमिकता में रखकर काम कर रही है ताकि लोगों को लंबे इंतजार से राहत मिल सके।

प्रशासन को साफ निर्देश दिए गए हैं कि जमीन से जुड़े मामलों को समय सीमा के भीतर निपटाया जाए। इसी वजह से जिलों में लगातार निगरानी भी की जा रही है और अधिकारियों को तय लक्ष्य दिए गए हैं।

उंगलियों तक पहुंच रही सरकारी सुविधा

डिजिटल दौर में सरकार अब अधिकतर सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने में लगी है। सेवा सेतु के जरिए प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू नक्शे तक की सुविधा लोगों तक पहुंचाई (Digital Governance) जा रही है। सरकार का मानना है कि जब किसान और आम नागरिक बिना परेशानी अपने काम करा पाएंगे, तभी असली सुशासन दिखाई देगा।

राज्य में अब सैकड़ों सेवाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। पहले जहां सीमित सेवाएं ही ऑनलाइन थीं, वहीं अब अलग अलग विभागों की सेवाओं को आपस में जोड़कर बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है।

दफ्तरों के चक्कर से मिल रही राहत

एक समय ऐसा भी था जब एक छोटे से प्रमाण पत्र के लिए कई कई बार सरकारी कार्यालय जाना पड़ता था। कई जगहों पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था और बिचौलियों का भी दबदबा रहता था। अब ऑनलाइन आवेदन और लोक सेवा केंद्रों के जरिए काम तेजी से होने लगे हैं।

लोग घर बैठे आवेदन कर पा रहे हैं और तय समय के भीतर दस्तावेज मिलने से राहत महसूस कर रहे हैं। गांवों में भी अब ऑनलाइन व्यवस्था का असर धीरे धीरे दिखाई देने लगा है।

सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ा

पुराने पोर्टल पर जहां सीमित सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब नए प्लेटफॉर्म पर 441 से ज्यादा सेवाओं को जोड़ा जा चुका है। कई नई सेवाएं शुरू की गई हैं और अलग अलग विभागों की सैकड़ों सेवाओं को एक साथ लिंक किया गया है।

सरकार इसे आने वाले समय में बड़ा बदलाव मान रही है। माना जा रहा है कि यही व्यवस्था आगे चलकर प्रशासनिक कामकाज का सबसे बड़ा आधार बन सकती है।

तय समय में काम पूरा होने का दावा

लोक सेवा गारंटी कानून के तहत अब समय सीमा में सेवा देना सिर्फ नियम तक सीमित नहीं (Digital Governance) रह गया है। बीते महीनों में लाखों आवेदन निपटाए जाने का दावा किया गया है। बड़ी संख्या में मामलों का समाधान तय अवधि के भीतर किया गया है।

आय प्रमाण पत्र, मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन और भू नक्शा जैसी सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। डिजिटल व्यवस्था के जरिए अब लोगों का समय भी बच रहा है और काम की रफ्तार भी पहले से तेज हुई है।

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