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UP Power Crisis : अपने ही विधायकों से घिरी सरकार, नाराज विधायक CM को लिख रहे चिट्ठियां

उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक ओर योगी सरकार लगातार दावा कर रही है कि प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली सप्लाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई विधायक अपने ही क्षेत्रों में हो रही बिजली कटौती और जनता की नाराजगी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा सरकार के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है।

बिजली संकट पर BJP विधायकों ने जताई नाराजगी

प्रदेश के कई बीजेपी विधायकों ने सार्वजनिक रूप से बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। विधायक राजेश्वर सिंह ने शिकायत निवारण व्यवस्था को और मजबूत बनाने की मांग की है। वहीं विधायक डॉ. नीरज बोरा ने भीषण गर्मी के दौरान लगातार हो रही बिजली कटौती पर चिंता व्यक्त की है।

विधायक अशोक कुमार ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात तक नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनियमित बिजली कटौती और सख्त चेकिंग अभियान से जनता में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका असर राजनीतिक रूप से भी पड़ सकता है।

अखिलेश यादव ने साधा निशाना

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता के बढ़ते गुस्से के कारण बीजेपी विधायक भी मजबूर होकर सरकार को पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इसे “महा विद्युत संकट” बताते हुए दावा किया कि सरकार की बिजली व्यवस्था जमीन पर फेल साबित हो रही है।

सरकार का दावा- रिकॉर्ड बिजली सप्लाई

ऊर्जा मंत्री A. K. Sharma ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति का नया रिकॉर्ड बनाया है। उनके मुताबिक प्रदेश में 31,824 मेगावाट की पीक डिमांड पूरी की गई, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।

सरकार का कहना है कि पिछले दस वर्षों में बिजली की मांग दोगुनी से अधिक हो चुकी है। वर्ष 2013-14 में जहां पीक डिमांड करीब 15,600 मेगावाट थी, वहीं अब यह 31,000 मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है। घर-घर एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों के बढ़ते उपयोग से सिस्टम पर दबाव बढ़ा है।

स्मार्ट मीटर विवाद ने बढ़ाई मुश्किल

बिजली कटौती के साथ-साथ स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर भी सरकार को विरोध का सामना करना पड़ा। कई जिलों में विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा और स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड मोड में संचालित करने का निर्णय लेना पड़ा। पुराने मीटरों को प्रीपेड स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया भी फिलहाल रोक दी गई है।

2027 चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिजली आपूर्ति बीजेपी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती रही है। ऐसे में बिजली कटौती, स्मार्ट मीटर विवाद और विधायकों की नाराजगी मिलकर विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे सकते हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के सामने चुनौती यह है कि रिकॉर्ड बिजली उत्पादन और सप्लाई के दावों को आम जनता के अनुभव से कैसे जोड़ा जाए।

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