Supreme Court : हत्या के आरोपियों पर सुप्रीम फैसला, अब पीड़ित की संपत्ति पर नहीं जता सकेंगे हक

देश में संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से अदालतों में बहस चलती (Supreme Court) रही है। कई परिवारों में हत्या और विरासत के विवाद एक साथ सामने आने के बाद कानूनी स्थिति को लेकर लोगों के बीच उलझन बनी रहती थी। अब सर्वोच्च अदालत के ताजा फैसले ने इस पूरे मुद्दे पर साफ संदेश दे दिया है। फैसले के बाद कानूनी हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
दिल्ली से लेकर कई राज्यों तक वकीलों और कानून के जानकारों के बीच इस निर्णय को लेकर लगातार बातचीत हो रही है। लोगों का कहना है कि अदालत ने सिर्फ कानून की व्याख्या नहीं की बल्कि न्याय और नैतिकता के आधार पर भी बड़ा संकेत दिया है। खासतौर पर हत्या के आरोपी द्वारा संपत्ति पर दावा करने के मामलों में यह फैसला अहम माना जा रहा है।
हत्या के आरोपी को नहीं मिलेगा उत्तराधिकार : Supreme Court
सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा है कि जिस व्यक्ति पर किसी की हत्या करने या हत्या के लिए उकसाने का आरोप है, वह मृतक की संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह नियम हर स्थिति में लागू रहेगा, चाहे मृतक ने वसीयत छोड़ी हो या नहीं छोड़ी हो।
पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर उसी इंसान की हत्या का आरोप है जिसकी संपत्ति पर वह दावा कर रहा है, तो उसे उस संपत्ति पर अधिकार जताने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत के अनुसार मुकदमा लंबित रहने की स्थिति में भी यह रोक जारी रहेगी।
न्याय और निष्पक्षता के आधार पर फैसला
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और आर महादेवन की पीठ ने कहा कि यह रोक केवल कानून की एक धारा तक सीमित नहीं है। अदालत ने माना कि न्याय, निष्पक्षता और समानता के सिद्धांत भी ऐसे मामलों में लागू होते हैं।
पीठ ने कहा कि यदि किसी अपराध के होने के मजबूत संकेत मौजूद (Supreme Court) हैं, तो दीवानी मामलों में हर बार कठोर और अंतिम स्तर के प्रमाण जरूरी नहीं माने जाएंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संपत्ति विवाद में नैतिक आधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वसीयत हो या नहीं, नियम रहेगा लागू
अदालत ने उत्तराधिकार से जुड़े दोनों पहलुओं को भी स्पष्ट किया। फैसले में कहा गया कि बिना वसीयत के संपत्ति का बंटवारा व्यक्तिगत कानूनों के आधार पर होता है, जबकि वसीयत होने पर संपत्ति उसी दस्तावेज के अनुसार बांटी जाती है।
हालांकि अदालत ने कहा कि हत्या या हत्या के लिए उकसाने के आरोप की स्थिति में कोई व्यक्ति दोनों ही हालात में संपत्ति पर अधिकार नहीं जता सकेगा। यानी वसीयत होने से भी ऐसे व्यक्ति को राहत नहीं मिलेगी।
कानून की इस धारा का दिया हवाला
पीठ ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 का जिक्र करते (Supreme Court) हुए कहा कि यह प्रावधान हत्या करने वाले या हत्या के लिए उकसाने वाले व्यक्ति को मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनने से रोकता है।
अदालत का यह फैसला कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आया। यह मामला बेंगलुरु की एक दीवानी अदालत के फैसले से जुड़ा हुआ था, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था।



