Bilaspur High Court Hearing : “आवारा कुत्तों का बढ़ता खौफ, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, बिलासपुर हाई कोर्ट में अगली सुनवाई मई में”

बिलासपुर में सड़कों पर बढ़ते आवारा पशुओं और कुत्तों के खतरे को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अब मामला एक अहम मोड़ पर पहुंच (Bilaspur High Court Hearing) गया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही करेगा, जिसने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में अपना निर्णय फिलहाल सुरक्षित रख लिया है।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने कहा कि शीर्ष अदालत में चल रही स्वत: संज्ञान याचिका का फैसला आने के बाद ही राज्य स्तर पर ठोस दिशा तय की जा सकेगी। इसी वजह से मामले की अगली सुनवाई मई महीने में निर्धारित की गई है। (Bilaspur High Court Hearing)
यह जनहित याचिका सड़कों पर बढ़ते आवारा मवेशियों और कुत्तों के कारण हो रही दुर्घटनाओं को लेकर दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने लगातार हो रहे हादसों, जानमाल के नुकसान और प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठाया है। अदालत ने भी इस पर गंभीर चिंता जताते हुए पूर्व में अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी।
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से एक व्यावहारिक सुझाव भी सामने आया था। इसमें कहा गया कि सड़कों पर घूमने वाले पशुओं पर पहचान टैग लगाया (Bilaspur High Court Hearing) जाए, जिससे उनके मालिक की जानकारी मिल सके और जिम्मेदारी तय की जा सके। स्थानीय निकायों ने इस दिशा में काम करने का भरोसा भी जताया है।
इससे पहले हाई कोर्ट ने सड़क हादसों को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जब तक जमीनी स्तर पर सुधार नहीं होगा, तब तक दुर्घटनाएं रुकना मुश्किल है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन करने की हिदायत भी दी गई थी।
वहीं दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है। जस्टिस विक्रमनाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि आक्रामक कुत्तों को स्थायी रूप से शेल्टर में रखा जाए या नसबंदी के बाद उन्हें वापस छोड़ा जाए। अदालत ने इस मुद्दे पर संतुलन बनाने की जरूरत बताई है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा और पशु अधिकार दोनों सुरक्षित रह सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों को आवारा कुत्तों से मुक्त (Bilaspur High Court Hearing) रखा जाए। साथ ही, एनएचएआई को राजमार्गों पर फेंसिंग और जानवरों को हटाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल, पूरे मामले की दिशा अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर है। जैसे ही फैसला आएगा, उसके आधार पर बिलासपुर हाई कोर्ट में आगे की सुनवाई और कार्रवाई तय की जाएगी। तब तक यह मुद्दा न केवल अदालतों में, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर विषय बना हुआ है।



