संपादकीय

संपादकीय: बड़े नेता तो वाणी पर संयम रखें

Editorial: राजनीति में पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप तो लगाते ही रहते हैं किन्तु बड़े नेताओं को तो कम से कम आरोप लगाने के समय अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। मर्यादा की सीमा रेखा नहीं लांघनी चाहिए। राजनीतिक सुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की होती है किन्तु देखा जा रहा है कि विपक्ष के नेता लगातार विवादास्पद और भड़काऊ बयानबाजी करते रहते हैं और इस पर पलटवार करते हुए सत्ता पक्ष के नेता भी उन्हीं की भाषा बोलने लगते हैं इसका संदेश पार्टी के अन्य नेताओं पर गलत पड़ता है और वे अपने बड़े नेताओं की देखादेखी जो मुंह में आये बोलने लगते हैं जिससे राजनीति में कटुता बढ़ती है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह को लेकर बेहद विवादास्पद टिप्पणी कर दी है। अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तथा आरएसएस को गद्दार करार दे दिया है। उनका आरोप है कि ये रोज संविधान पर हमला कर रहे हैं और चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों देश का हित बेच चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी को इस तरह की विवादास्पद टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी किन्तु उनके लिए यह कोई नई बात नहीं है वे पहले भी कई बार देश की 140 करोड़ जनता द्वारा चुने गये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर चुके हैं और इसका उनकी पार्टी को खामियाजा भुगतना पड़ चुका है।

खुद उन्हें भी न्यायालय में माफी मांगनी पड़ी है इसके बावजूद भी वे सबक लेने के लिए तैयार नहीं है। वेवजह वे आक्रामक तेवर दिखाते हैं और हास्य का पात्र बनकर रह जाते हैं। राहुल गांधी के इस बयान के बाद उनके खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज हो गया है। वहीं भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन ने राहुल गांधी पर तिखा वार करते हुए कहा है कि उनका यह बयान राहुल गांधी की अराजक सोच और चरित्र को दर्शाता है इसके लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि न सिर्फ उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का अपमान किया है बल्कि देश की 140 करोड़ जनता को अपमानित किया है।

भाजपा के भाजपा के बड़बोले नेताओं ने भी राहुल गांधी के खिलाफ टिका टिप्पणी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फणडवीस ने तो रिजेक्टेट माल कह कर उनकी खिल्ली उड़ा दी है। सही बात है कि कृया की प्रतिक्रिया तो होती ही है। राहुल गांधी को कम से कम अपने पद की गरिमा का तो ख्याल रखना चाहिए वे लोकसभा में नेताप्रतिपक्ष है इसलिए उन्हें शालीनता का परिचय देना चाहिए। विपक्ष के नेताओं को चाहिए कि इस तरह की अपमानजनक टिका टिप्पणी करने से परहेज करें। यह ठीक है कि राजनीति में पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद होते हैं लेकिन मर्यादा की सीमा रेखा किसी को भी नहीं लांघनी चाहिए अन्यथा दुनिया में भारतीय लोकतंत्र का मजाक बनता है।

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