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Supreme Court : अब हर जिले में बढ़ेगी आपात तैयारी, सुप्रीम अदालत ने राज्यों को दिए बड़े निर्देश

देशभर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बुधवार को हुई सुनवाई के बाद अस्पतालों और आपात सेवाओं को लेकर नई चर्चा शुरू (Supreme Court) हो गई है। अदालत के निर्देश सामने आने के बाद कई राज्यों के स्वास्थ्य विभागों में हलचल तेज हो गई। खासकर छोटे जिलों में गंभीर मरीजों के इलाज और उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर अब नई तैयारी की बात हो रही है।

अस्पतालों में आइसीयू सुविधाओं की स्थिति और एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देशों के बाद माना जा रहा है कि राज्यों पर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का दबाव बढ़ेगा।

हर जिले में पांच क्रिटिकल केयर एंबुलेंस रखने के निर्देश : Supreme Court

सुप्रीम अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले में वेंटिलेटर सुविधा वाली कम से कम पांच क्रिटिकल केयर एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाएं। अदालत ने कहा कि गंभीर मरीजों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है। इसके लिए राज्यों को अलग से संसाधन जुटाने की भी छूट दी गई है।

सीएसआर और सामाजिक संस्थाओं से मदद लेने की बात

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य चाहें तो कंपनियों के सीएसआर फंड या सामाजिक संस्थाओं की मदद से भी यह व्यवस्था तैयार कर सकते हैं। इसके लिए जुटाई जाने वाली राशि को अलग खाते में रखने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि खर्च की निगरानी हो सके।

आइसीयू के लिए एक समान मानक लागू होंगे

अदालत ने विशेषज्ञ समिति की ओर से तय आइसीयू मानकों को स्वीकार करते (Supreme Court) हुए सभी राज्यों को पहले स्तर के आइसीयू मानदंड लागू करने को कहा है। साथ ही राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि जहां कमियां हैं उन्हें दूर करने की योजना बनाकर 31 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करें।

नर्सिंग कालेजों पर भी अदालत सख्त

सुनवाई के दौरान अदालत ने भारतीय नर्सिंग परिषद से भी जवाब मांगा। अदालत ने कहा कि नर्सिंग कालेजों से संबद्ध अस्पताल बहुत दूर नहीं होने चाहिए। अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि नियमों में 30 किलोमीटर तक दूरी की अनुमति है।

अगस्त में होगी अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट भी अदालत में पेश (Supreme Court) की गई। अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी जहां राज्यों की तैयारी और रिपोर्ट पर आगे चर्चा की जाएगी।

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