Politics in Bihar : बिहार में सियासी भूचाल - Navpradesh

Politics in Bihar : बिहार में सियासी भूचाल

Politics in Bihar : Political earthquake in Bihar

Politics in Bihar

Politics in Bihar : बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार लगता है कि अब जल्द ही फिर पाला बदलने जा रहे है। भाजपा के साथ गठबंधन सरकार चला रहे नितिश कुमार एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठजोड़ करने की कवायद कर रहे है। जिससे बिहार की राजनीति में भूचाल आना स्वाभाविक है। गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार और भाजपा नेताओं के बीच मतभेद अब मनभेद के रूप में तब्दील होने लगे है।

इसकी एक बड़ी वजह आरसीपी सिंह है जो बिहार सरकार (Politics in Bihar) में और जनता दल यूनाईटेड में नंबर दो ही हैसियत रखते थे यहंां तक कि उन्हे नितिश कुमार ने जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना दिया था। किन्तु आरसीपी सिंह ने आपसी मतभेदों के चलते उनसे किनारा कर लिया। दरअसल आरसीपी सिंह केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में शामिल थे लेकिन इस बार उन्हे नितिश कुमार ने राज्यसभा के लिए नहीं भेजा था जिससे वे और नाराज हो गए। आरसीपी सिंह जदयू के वरिष्ठ नेता रहे है और उनकी जदयू में अच्छी खासी पकड़ है। जदयू के अनेक विधायक उनके कट्टर समर्थक है।

ऐसी स्थिति में यदि नितिश कुमार भाजपा को तलाक देकर राजद के साथ गठजोड़ करते है तो आरसीपी सिंह जदयू में दो फाड़ कर सकते है और बिहार में महाराष्ट्र दोहराया जा सकता है। कुल मिलाकर बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलने जा रहे है। नितिश कुमार ने अपने विधायक दल की बैठक भी आहूत की है जिसमें वे कोई बड़ा फैसला कर सकते है, किन्तु इधर केन्द्र के बुलावे पर बिहार के राज्यपाल नई दिल्ली पहुंच गए है जहां से वे कब वापस पटना लौटेंगे यह पता नहीं है।

ऐसी स्थित में नितिश कमार को अपना कार्यक्रम कुछ दिनों के लिए स्थगित करना पड़ेगा क्योंकि यदि वे भाजपा के मंत्रियों को बर्खास्त करना चाहे या खुद इस्तीफा देना चाहे तो भी वे राज्यपाल की अनुपस्थिति में ऐसा कुछ नहीं कर पाएंगे और इस बीच भाजपा को बिहार में खेल करने का अवसर मिल जाएगा।

दरअसल नितिश कुमार (Politics in Bihar) की इच्छा यह थी कि उन्हे भाजपा राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाएं ताकि वे देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने की अपनी हसरत पूरी कर सके क्योंकि प्रधानमंत्री बनना तो अब उनके बूते की बात नहीं रह गई है। लेकिन भाजपा ने उन्हे राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नहीं बनाया जिससे वे अब अपनी अलग राह चुनने के लिए तैयार हो गए है। वैसे भी नितिश कुमार इतनी बार पाला बदल चुके है कि उनकी विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है। देखना होगा कि अब वे क्या कदम उठाते है।

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