Kashi Tamil Sangamam : इस बार दो चरणों में होगा काशी–तमिल संगमम, दो दिसंबर से होगी शुरुआत
तमिलनाडु सरकार के हिंदी और संस्कृत विरोधी रुख को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने इस वर्ष काशी–तमिल संगमम को पहले से अधिक भव्य और विस्तृत रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया है। संस्कृति और शिक्षा के इस अनूठे संगम को इस बार दो चरणों में किया जाएगा।
इसकी थीम ‘चलो तमिल सीखें’ रखी गई है, जिससे भाषा और परंपरा के संबंधों को और सशक्त बनाया जा सके। आयोजन का यह रूपांतरण (Kashi Tamil Sangamam) को नई ऊँचाई देने वाला माना जा रहा है।
पहले चरण की शुरुआत दो दिसंबर से होगी, जो 15 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान तमिलनाडु के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 1,500 युवाओं, उद्यमियों और कला–संगीत प्रेमियों का दल काशी आएगा। दूसरे चरण की शुरुआत 16 दिसंबर से होगी और 30 दिसंबर तक चलेगी,
जिसमें देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के 350 छात्रों का दल तमिलनाडु जाकर सांस्कृतिक व भाषाई अनुभव प्राप्त करेगा। यह नई संरचना (Kashi Tamil Sangamam) के प्रभाव को देशव्यापी स्तर पर विस्तृत करने का प्रयास है।
इस आयोजन का विशेष आकर्षण यह है कि दोनों चरणों में छात्रों को तमिल भाषा भी सिखाई जाएगी। पहले चरण में तमिलनाडु से हिंदी जानने वाले 50 तमिल शिक्षक काशी आएंगे और 14 दिनों तक 30 स्कूलों में बच्चों को सरल व व्यावहारिक तमिल भाषा का प्रशिक्षण देंगे।
वहीं दूसरे चरण में भारतभर के 350 छात्र तमिलनाडु के नौ शिक्षण संस्थानों में रहकर तमिल सीखेंगे। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने बताया कि यह दल अलग-अलग समूहों में आएगा, जिससे (Kashi Tamil Sangamam) का प्रभाव अधिक व्यापक और अनुभवसम्पन्न बनेगा।
पहला दल एक दिसंबर को काशी पहुंचेगा, जिसे तमिलनाडु के प्राचीन नगरों और काशी के ऐतिहासिक जुड़ाव से अवगत कराया जाएगा। यह दल प्रयागराज के संगम और अयोध्या में श्रीराम मंदिर का दर्शन भी करेगा।
इस अभियान के तहत IIT मद्रास ने ‘विद्या शक्ति’ पोर्टल के माध्यम से तमिल भाषा सिखाने की एक बड़ी मुहिम भी शुरू की है। अब तक 650 से अधिक स्कूल इससे जुड़ चुके हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के 350 स्कूल शामिल हैं—जहाँ लगभग 15,000 छात्र तमिल सीख रहे हैं।
दो दिसंबर को टेनकाशी (तमिलनाडु) से महर्षि अगस्त से जुड़े स्थलों की यात्रा शुरू होगी, जो 10 दिसंबर को छह राज्यों से होते हुए काशी पहुँचेगी। यह यात्रा भी (Kashi Tamil Sangamam) की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक सेतु को मजबूत करने का संदेश देगी।
