छत्तीसगढ़

कचना-लामांडी-सड्डू को मिलेगा सुनियोजित विकास का नया स्वरूप

रायपुर. राजधानी के तेजी से विकसित हो रहे कचना, लामांडी और सड्डू क्षेत्र को अब सुनियोजित शहरी विकास का स्वरूप देने की तैयारी है। रायपुर विकास प्राधिकरण ने छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 49 एवं 50 के तहत नगर विकास योजना का प्रारूप तैयार किया है। योजना में भूस्वामियों को सड़क, जलापूर्ति, सीवर, बिजली सहित अन्य जरूरी सुविधाओं से युक्त अंतिम भूखंड उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

योजना की खास बात यह है कि किसी भी भूमिस्वामी को भूमिहीन नहीं किया जाएगा। मूल भूखंड के 40 प्रतिशत हिस्से को मिश्रित भू-उपयोग के तहत अंतिम भूखंड के रूप में आवंटित करने का प्रस्ताव है। वहीं, 100 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले मूल भूखंड के स्वामियों के लिए भी नेबरहुड शॉपिंग क्षेत्र में अंतिम भूखंड का प्रावधान किया गया है।

बिखरी जमीन को एकीकृत कर मिलेगा व्यवस्थित भूखंड

योजना से उन भूस्वामियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनकी जमीन अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है। ऐसे खंडित भू-स्वामित्व को बसरा नंबर के आधार पर एकीकृत कर पूरे रकबे के अनुरूप एक अंतिम भूखंड देने का प्रस्ताव है। इससे जमीन का बेहतर और व्यवस्थित उपयोग हो सकेगा।

नियमानुसार अंतिम भूखंड उसी गांव में प्रस्तावित किए गए हैं, जहां संबंधित भूमिस्वामी की मूल जमीन स्थित है। इससे विकास योजना के साथ स्थानीय भूस्वामित्व को भी बरकरार रखने का प्रयास किया गया है।

45 मीटर तक चौड़ी सड़कें, बेहतर होगी कनेक्टिविटी

नगर विकास योजना में मौजूदा और प्रस्तावित मार्गों का भौतिक सर्वेक्षण के आधार पर संरेखण किया गया है। इसमें 45, 30, 24 और 18 मीटर चौड़ी प्रमुख सड़कों के साथ 18 और 12 मीटर चौड़ी अन्य सड़कों का भी प्रावधान है।

बड़े भूखंडों को 45, 30 और 24 मीटर चौड़ी सड़कों से जोड़ने का प्रस्ताव है, जबकि छोटे भूखंडों को 18 और 12 मीटर चौड़ी सड़कों पर रखने की योजना है। इससे भविष्य में बढ़ने वाली आबादी और यातायात को ध्यान में रखते हुए आवागमन तथा प्रवेश-निकास व्यवस्था बेहतर करने में मदद मिलेगी।

6.7 एकड़ खुला क्षेत्र, 4.8 एकड़ में बनेगा नगरीय वन

योजना में आवास और व्यावसायिक विकास के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा गया है। कुल योजना क्षेत्र की 7.29 प्रतिशत भूमि खुले क्षेत्र और नगरीय वन के लिए आरक्षित की गई है। करीब 6.7 एकड़ में खुला क्षेत्र और 4.8 एकड़ में नगरीय वन विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

स्कूल से स्वास्थ्य केंद्र तक सुविधाएं

सामाजिक अधोसंरचना के लिए योजना में 7.94 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है। यहां विद्युत उपकेंद्र, पुलिस चौकी, आंगनबाड़ी, विद्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। निम्न आयवर्ग के परिवारों के लिए भी भूमि आरक्षित की गई है, ताकि क्षेत्र में समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

सितंबर में प्रारूप को मिली मंजूरी

कचना, लामांडी और सड्डू नगर विकास योजना को लेकर रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल से 10 सितंबर 2025 को सैद्धांतिक सहमति मिली थी। योजना के आशय की घोषणा 5 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित की गई। प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों पर अंतर्विभागीय समिति ने 12 फरवरी 2026 को सुनवाई की। इसके बाद प्रारूप योजना को 10 सितंबर 2026 को संचालक मंडल की स्वीकृति मिली और 11 सितंबर को इसका प्रकाशन किया गया।

अभी अंतिम नहीं हुआ भूखंड आवंटन

रायपुर विकास प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि योजना में दर्शाए गए अंतिम भूखंडों का आवंटन अभी प्रस्तावित स्तर पर है। अधिनियम की धारा 50(3) के तहत संबंधित पक्षों से 30 दिन के भीतर दावे और आपत्तियां मांगी गई हैं। दावे एवं आपत्तियां 10 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तुत की जा सकती हैं।

योजना के लागू होने के बाद कचना, लामांडी और सड्डू में सड़क, जलापूर्ति, सीवर, बिजली, हरित क्षेत्र और सामाजिक सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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