छत्तीसगढ़

जगदलपुर और दंतेवाड़ा में लगेंगे वृहद शिविर, 3799 हितग्राहियों को मिलेंगे कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण

रायपुर। बस्तर संभाग के दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए जगदलपुर और दंतेवाड़ा में वृहद शिविर आयोजित किए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिविरों की तैयारियों की समीक्षा कर अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। अभियान में नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों में अंग गंवा चुके नागरिकों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया गया है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित न रहे। ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार करने तथा आईईडी विस्फोटों से प्रभावित दिव्यांगजनों का अलग से विवरण रखने के निर्देश दिए गए हैं। शिविरों में कृत्रिम अंग, ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, कैलिपर्स और श्रवण यंत्र समेत अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। जिन हितग्राहियों के पास दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं है, उनका मौके पर ही स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के माध्यम से प्रमाणीकरण कराने की व्यवस्था भी की जाएगी।

जगदलपुर में 2953 हितग्राही होंगे शामिल

पहला तीन दिवसीय शिविर 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर में आयोजित होगा। 5 अक्टूबर को बस्तर, 6 अक्टूबर को नारायणपुर और कोंडागांव तथा 7 अक्टूबर को कांकेर जिले के चयनित हितग्राही शामिल होंगे। इस शिविर के लिए कुल 2953 हितग्राहियों को चिह्नित किया गया है।

इसके बाद 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा के पुलिस लाइन परिसर में शिविर लगेगा। इसमें दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिलों के 846 हितग्राहियों को कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और अन्य सहायक उपकरण दिए जाएंगे। दोनों स्थानों पर कार्यक्रम सुबह 8 बजे से शुरू होंगे।

निःशुल्क परिवहन और भोजन की व्यवस्था

शिविर में आने वाले दिव्यांगजनों के लिए संबंधित जिला प्रशासन निःशुल्क परिवहन और भोजन की व्यवस्था करेगा। हितग्राहियों को पहचान के लिए आधार कार्ड या अन्य पहचान प्रमाण की प्रति तथा दो पासपोर्ट आकार के फोटो साथ लाने होंगे। जयपुर से आने वाली विशेषज्ञ तकनीकी टीम नए उपकरण उपलब्ध कराने के साथ पुराने कृत्रिम अंगों की मरम्मत भी करेगी।

शिविर स्थल पर छाया, पेयजल, शौचालय, बिजली, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी। बीपी और शुगर की जांच भी की जाएगी। व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को नोडल जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आईईडी-मुक्त गांव बनाने पर भी जोर

उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि दूरदराज के जरूरतमंदों तक इसकी जानकारी पहुंच सके। इसके लिए प्रेस वार्ता, सामाजिक माध्यमों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों के माध्यम से प्रचार किया जाएगा। दिव्यांगजनों की सहायता के लिए स्काउट-गाइड के स्वयंसेवक भी तैनात किए जाएंगे।

बैठक में कमिश्नर डोमन सिंह ने शिविरों की प्रशासनिक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि ग्राम सभाओं के माध्यम से गांवों में सुरक्षा का सत्यापन कर उन्हें आईईडी-मुक्त ग्राम घोषित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पुलिस महानिरीक्षक, संभाग के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और स्वास्थ्य एवं नगरीय निकाय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। जगदलपुर में कलेक्टर आकाश छिकारा ने धरमपुरा में आयोजित होने वाले शिविर की तैयारियों की जानकारी दी। बैठक में पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा और जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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