प्रसंगवश : कोरोना से निपटने Speaker Dr Charandas Mahant की इन दो बातों पर अमल बेहद जरूरी, पिछले माह कहा था…

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अश्विन अगाड़े

कोरोना (Corona) से निपटने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत (speaker dr charandas mahant) की बातों  पर अमल भी इस महामारी में दी जाने वाली दवा की तरह ही जरूरी हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, संत कबीर, गुरु घासीदास जैसे महापुरुषों की वाणी का उदाहरण देकर छत्तीसगढ़ विधानसभा के सुचारू संचालन के लिए छत्तीसगढ़ के साथ ही पूरे देश में जाने जाते हैं। जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान महापुरुषों की वाणी में है, इस बात को डॉ. महंत ने कई अवसरों पर साबित किया, फिर बात चाहे आम जीवन की हो राजनीतिक–सार्वजनिक जीवन की।

पिछले माह नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. महंत (speaker dr charandas mahant) ने कहा था- ‘मुंह पर मास्क लगाओ पर वाणी की मिठास कम न होने दें। फिजिकल व सोशल  डिस्टेंसिंग का पालन करो पर एक दूसरे के प्रति दिलों में दूरी को पैदा न होने दें।’

मैं उनकी इन दो बातों का उल्लेख इसलिए कर रहा हूं क्योंकि मेरी कोरोना (corona) रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मैं भी इनडोर स्टेडियम के कोविड सेंटर में एडमिट था। इस दौरान यहां एक दिन ऐसा घटनाक्रम सामने आया कि मुझे सहसा ही   विधनसभा अध्यक्ष की उक्त बातें याद आ गईं। दरअसल हुआ यूं कि स्टेडियम में एक रात एक मरीज अपने ब्लॉक के बाहर आकर बैठ गया । मैंने इशारों में उसका हाल जानना चाहा। उसने कोई जवाब नहीं दिया। दूसरे दिन दोपहर से दलजीत सिंह के नाम का अनाउंसमेंट हो रहा था। उसे मेकाहारा रेफर किया गया था।

उसे गेट पर एंबुलेंस तक आने के लिए कहा जा रहा था। लेकिन शायद असहज महसूस करने के कारण वह ठीक ढंग से चल नहीं पा रहा था। पीपीई किट, फेस शील्ड आदि की सुविधा से लैस कोई कोरोना वॉरियर भी उसे ले जाने के लिए अंदर नहीं आया। दोपहर से शाम तक उसके नाम का अनाउंसमेंट होता रहा। दूसरे मरीज आपस में बातें करते रहे कि- कौन है दलजीत सिंह? आखिर कहां होगा?… काश हमारे लिए भी एक-दो पीपीई किट की व्यवस्था करा देते तो हम उसे एंबुलेंस तक पहुंचा देते। शाम को एक दुबला-पतला शख्स धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ाते हुए स्टेडियम के अंदर के गेट की ओर बढ़ रहा था। बाहर एंबुलेंस खड़ी थी। पूछने पर पता चला कि यही दलजीत सिंह है। गौर से देखने पर पता चला कि यह वही मरीज है, जो बीती रात को अपने ब्लॉक के बाहर असहज अवस्था में बैठा हुआ था।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत (speader dr charandas mahant)की बातों पर अमल की जरूरत का ये एक उदाहरण हुआ । दूसरा- कुछ मामलों में ये देखने में आया है कि जिन लोगों की कोरोना (corona) रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है उनसे उनके आस-पड़ोस के लोग उनसे दिलों की दूरी भी बना ले रहे हैं। किसी के घर में कोई पॉजिटिव आ जाए तो उसके घर के अन्य लोगों से भी लोग बात करना बंद कर दे रहे हैं। फिजिकल या सोशल डिस्टेंिसंग का ये अर्थ कतई नहीं है। बल्कि होना ये चाहिए कि आस पड़ाेस के लोगों को अपने पड़ोसी पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति के परिजन से सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए बातचीत कर उनका हौसला बढ़ाना चाहिए, जैसा कि लोग अन्य बीमारियों में करते हैं। 

हमारे मन में खुद की सुरक्षा के साथ ही मानव सेवा का भाव भी शीर्ष पर होना चाहिए। आम नागरिकों से लेकर कोरोना वॉरियर्स तक में ये भाव तब ही संभव है जब हम िवधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत (speaker dr charandas mahant) की उक्त बातों पर अमल करें। डॉ. महंत ने खुद भी जनहित में इस भाव का परिचय दिया है। उन्होंने कोरोना काल में संपूर्ण सुरक्षा उपायों के साथ विधानसभा का मानसून सत्र आहूत कराया, जिससे प्रदेश के महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत हो सकी।

वैसे भी जिस देश में बाबा आमटे जैसे समाज सेवी हो चुके हो, उस देश में दिलों की दूरी बिल्कुल भी अशोभनीय है। बाबा आमटे  ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर न केवल स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लिया, बल्कि अपना पूरा जीवन कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित कर दिया। महाराष्ट्र के वरोरा स्थित उनके आश्रम में एेसे-ऐसे कुष्ठ रोगी हैं, जिनकों उनके परिवार ने भी ठुकरा दिया। लेकिन बाबा आमटे ने उन्हें अपनाकर व उनकी सेवा कर मानवता की मिसाल पेश की। बहरहाल ये मान भी लें कि कोरोना संक्रमण कुष्ठ रोग से कहीं ज्यादा खतरनाक है, फिर भी यह कहना अतिशेयाक्ति नहीं होगा कि िदलों की दूरी और वाणी की कटुता वायरस से भी ज्यादा कष्टकारक होगी।  

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