छत्तीसगढ़

Chhattisgarh High Court : साथ रहने से इनकार और 2 करोड़ रुपये की शर्त क्यों बनी तलाक की वजह, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

वैवाहिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ऐसा फैसला (Chhattisgarh High Court ) सुनाया है, जिसकी कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई जीवनसाथी लंबे समय तक साथ रहने से इनकार करे और तलाक के लिए सहमति देने के बदले अत्यधिक धनराशि की मांग करे, तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक संबंधी फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि ऐसे हालात में विवाह को जबरन बनाए रखने का कोई सार्थक उद्देश्य (Chhattisgarh High Court) नहीं रह जाता। अदालत ने यह भी माना कि लंबे समय तक अलगाव और सुलह की असफल कोशिशें वैवाहिक संबंधों के पूरी तरह टूट जाने का संकेत हैं।

फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार Chhattisgarh High Court

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ पत्नी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ थी, जिसमें पति को क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक दिया गया था। पति का कहना था कि पत्नी फरवरी 2022 में वैवाहिक घर छोड़कर चली गई थी और परिवार के कई प्रयासों तथा काउंसलिंग के बावजूद वापस लौटने के लिए तैयार नहीं हुई।

पत्नी ने लगाए थे ये तर्क

पत्नी ने अदालत में आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह विवाह जारी रखना चाहती थी। उसने यह भी दावा किया कि पति ने वैवाहिक प्रोफाइल बनाकर स्वयं को तलाक का इच्छुक बताया था, जिससे उसके इरादे स्पष्ट होते हैं।

हालांकि अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए पाया कि पत्नी लगातार साथ रहने से इनकार करती रही और दोनों पक्षों के बीच सुलह की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी थी।

2 करोड़ रुपये की मांग बनी अहम आधार Chhattisgarh High Court

सुनवाई के दौरान पत्नी ने स्वीकार किया कि उसने तलाक के लिए सहमति देने के बदले पति से 2 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि मांगी थी। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था, लेकिन इसी आर्थिक मांग के कारण समझौता नहीं हो सका।

हाईकोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी धनराशि को शर्त बनाना, लंबे समय तक अलग रहना और वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करने से इनकार करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।

लंबे अलगाव को भी माना महत्वपूर्ण

अदालत ने कहा कि दोनों पक्ष फरवरी 2022 से अलग रह रहे हैं। कई मुकदमे लंबित हैं और मध्यस्थता भी असफल रही। ऐसे में विवाह को जारी रखने से दोनों पक्षों की मानसिक पीड़ा ही बढ़ेगी।

10 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता बरकरार

हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का सही मूल्यांकन (Chhattisgarh High Court) किया है और उसके फैसले में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है। इसी आधार पर पत्नी की अपील खारिज कर दी गई और पति को दिए गए तलाक के आदेश के साथ 10 लाख रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता भी बरकरार रखा गया।

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