राजनीति

TMC Rebellion : जिन चेहरों को आगे बढ़ाया गया, आखिर वही क्यों खड़े हो गए विरोध में

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नई हलचल ने सबका ध्यान खींच (TMC Rebellion) लिया है। पार्टी के भीतर उठ रही नाराजगी अब बंद कमरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही। जिन नेताओं को हाल के वर्षों में नई पहचान और बड़ी जिम्मेदारी मिली थी, वही अब संगठन की कार्यशैली को लेकर सवाल उठा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

राज्य के कई हिस्सों में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति को केवल पुराने नेताओं की नाराजगी नहीं माना जा रहा, बल्कि नए और युवा चेहरों की बेचैनी के रूप में भी देखा जा रहा है। यही वजह है कि यह मामला अब सामान्य राजनीतिक मतभेद से कहीं बड़ा नजर आने लगा है।

पहली बार सांसद बने कई चेहरे भी असंतुष्ट : TMC Rebellion

तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ उभरे विद्रोही गुट में उन 20 सांसदों के नाम सामने आए हैं जिन्होंने नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई है। इनमें 10 सांसद ऐसे बताए जा रहे हैं जो पहली बार लोकसभा पहुंचे थे। इन नेताओं को पार्टी ने नए दौर की राजनीति का चेहरा बनाकर आगे बढ़ाया था।

इन सांसदों में जादवपुर से सयानी घोष, बहरामपुर से यूसुफ पठान, बैरकपुर से पार्थ भौमिक, आरामबाग से मिताली बाग, पूर्वी बर्धमान से डॉ. शर्मिला सरकार, बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती, झाड़ग्राम से कालीपद सोरेन, मेदिनीपुर से जून मालिया, हुगली से रचना बनर्जी और मथुरापुर से बापी हालदार शामिल बताए जा रहे हैं।

चुनावी जीत के बाद बढ़ा असंतोष

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ये सभी नेता पार्टी के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे थे। उस समय रणनीति के तहत पुराने चेहरों की जगह नए और युवा नेताओं को अधिक अवसर दिया गया था। लेकिन विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद इन्हीं सांसदों के बीच सबसे ज्यादा असंतोष देखने को मिल रहा है।

अलग पहचान बनाने की कोशिश

वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार को इस विरोध की अगुवाई करते हुए देखा जा रहा है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग बैठक व्यवस्था की मांग की है। विरोध कर रहे सांसद राज्य में कथित कुप्रबंधन, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कई नए सांसद अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र पहचान बना (TMC Rebellion) चुके हैं। ऐसे में वे अब केवल संगठन की तय लाइन पर चलने के बजाय अपनी राय खुलकर रखना चाहते हैं।

यूसुफ पठान पर भी टिकी नजर

बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा में है। खेल जगत से राजनीति में आए यूसुफ को पार्टी ने अल्पसंख्यक बहुल सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। उन्होंने बड़ी जीत दर्ज कर संसद तक का सफर तय किया।

हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक माहौल में उनके रुख को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे वे किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं।

रचना बनर्जी भी चर्चा के केंद्र में

हुगली से सांसद रचना बनर्जी मनोरंजन जगत का चर्चित चेहरा रही हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर राजनीति में मजबूत शुरुआत की थी। फिल्मों और टेलीविजन की लोकप्रियता ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। अब पहली बार सांसद बनी रचना का नाम भी असंतुष्ट सांसदों के साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला है।

कई नए चेहरे हुए विरोधी खेमे में शामिल

बैरकपुर से सांसद पार्थ भौमिक, जिन्हें संगठन के प्रभावशाली नेताओं के करीबी के रूप में देखा जाता रहा है, उनका नाम भी विरोधी गुट में शामिल बताया जा रहा है। वहीं पूर्वी बर्धमान से सांसद डॉ. शर्मिला सरकार भी इस असंतोष की लहर का हिस्सा मानी जा रही हैं।

डॉ. शर्मिला सरकार चिकित्सक पृष्ठभूमि से आती हैं और पहली बार सांसद बनी थीं। सामाजिक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी उनकी छवि को पार्टी की महत्वपूर्ण पहचान माना जाता रहा है।

क्या बड़ा राजनीतिक बदलाव आने वाला है

लोकसभा में पार्टी के 28 सांसद हैं और इनमें से 20 सांसदों के असंतुष्ट होने की चर्चा ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर (TMC Rebellion ) दिए हैं। हालांकि नेतृत्व की ओर से स्थिति को संभालने की कोशिश जारी बताई जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर भी इस्तीफों और नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का नहीं बल्कि संगठन के भीतर बदलते शक्ति संतुलन और नई पीढ़ी की राजनीतिक सोच से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Related Articles

Back to top button