Bihar Assembly: कोरोना काल में बिहार में बदलाव की बयार

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Bihar Assembly: कोरोना काल में हुए बिहार विधानसभा के लिए तीन चरणों में शांति पूर्ण मतदान हो गया। यद्यपि छिटपुट हिंसा की घटनाएं जरूर हुई लेकिन अपेक्षाकृत शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न हुआ और अब दस नवबंर को इसके नतीजे सामने आएंगे।

इस बीच विभिन्न खबरियां चैनलों ने तीसरे चरण के मतदान के तत्काल बाद जो एग्जिट पोल पेश किया है उसमें सभी में एनडीए की बिदाई के संकेत दिए है। वहीं महागठबंधन (Bihar Assembly) के जीत की संभावना व्यक्त की गई है। यदि एग्जिट पोल के ये पूर्वानुमान सही साबित होते हैं तो यही माना जाएगा, कि बिहार की जनता ने इस बार बदलाव के लिए वोट किया था।

वैसे भी नितिश कुमार लगातार तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं और इस बार भी भाजपा ने उन्हीं के चेहरे को आगे रखकर यह चुनाव लड़ा था। जिसका खामियाजां भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। यद्यपि भाजपा की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की संभावना व्यक्त की जा रही है लेकिन जदयू बूरी तरह से हार रही है।

रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके बेटे चिराग पासवान (Bihar Assembly) ने गठबंधन से खुद को अलग कर लिया था और लोजपा ने उन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए जहां से जदयू चुनाव लड़ रही थी। इस तरह लोजपा ने जदयू को कई सीटों पर कमजोर किया। भले ही लोजपा की सात से आठ सीटे ही आ रही है लेकिन उसने वोट कटवा पार्टी बनकर जदयू को कम से कम 25 सीटों पर हार की कगार पर पहुंचाने का काम किया है।

दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल बदलाव की इस बयार में चुनावी वैतरणी पार करने में सफल होती दिख रही है। राजद को सौ से अधिक सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है और सबसे बड़ी पार्टी बनकर तेजस्वी यादव बिहार के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं। राजद ने बिहार के युवाओं को दस लाख नौकरी देने का जो वादा किया है उसने युवा मतदाताओं को आकर्षित किया है।

वहीं उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान चारा घोटाले में जेल की हवा खा रहे अपने पिता लालू यादव और माता राबड़ी देवी की तस्वीर का उपयोग ना करके यह संदेश भी देने की कोशिश थी कि राजनीति में वे लालू वादा से अलग हटकर अपनी नई पारी शुरू कर रहे हैं।

इसका भी युवा मतदाताओं पर अच्छा असर पड़ा है। कुल मिलाकर बिहार में इस बार परिवर्तन की आंधी चलने के संकेत मिले हैं और एक बार फिर लालू यादव की अनुपस्थिति के बावजूद बिहार में राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई में सरकार बनने का मार्ग प्रसस्त होता दिख रहा है।

महागठबंधन में शामिल कांग्रेस और वामपंथि दलों को भी अच्छी खासी सीटें हासिल होने जा रही है। बहरहाल यह पूर्वानुमान ही है बिहार विधानसभा की सही तस्वीर तो दस नवबंर को ही साफ होगी जब ईवीएम का मुंह खुलेगा और जनादेश निकलेगा।

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