
रायपुर। छत्तीसगढ़ में योग शिक्षा, अनुसंधान और इसके वैज्ञानिक प्रसार को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल (AYUSH System Yoga Chhattisgarh) किया है। मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में ‘योग’ विषय को समाज कल्याण विभाग के क्षेत्राधिकार से पूरी तरह हटाकर अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
सरकार का यह निर्णय प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने और योग की वैज्ञानिक प्रकृति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इस ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ में योग को अब केवल एक सामाजिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि एक संपूर्ण चिकित्सा विज्ञान के रूप में देखा और विकसित किया जाएगा।
आयुष प्रणाली का अभिन्न अंग है योग, अब मिलेगा राष्ट्रीय तालमेल : AYUSH System Yoga Chhattisgarh
दरअसल, योग अनादि काल से हमारी प्राचीन आयुष (AYUSH) चिकित्सा प्रणाली का एक बेहद अनिवार्य और अभिन्न अंग रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी योग से जुड़ी तमाम बड़ी शैक्षणिक, प्रामाणिक और अनुसंधान (Research) गतिविधियां आयुष तंत्र के माध्यम से ही संचालित और नियंत्रित होती हैं। समाज कल्याण विभाग के पास चिकित्सा और वैज्ञानिक रिसर्च के संसाधनों की कमी थी, जिसके कारण योग के क्लिनिकल और साइंटिफिक विकास में अड़चनें आ रही थीं। अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने से इसे मेडिकल कॉलेजों, आयुष डॉक्टरों और आधुनिक लैब का सीधा साथ मिल सकेगा।
उच्च स्तरीय कोर्सेज और वैज्ञानिक प्रशिक्षण की खुलेगी राह
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब छत्तीसगढ़ में योग से संबंधित उच्च स्तरीय शैक्षणिक पाठ्यक्रमों (जैसे डिग्री, डिप्लोमा और डॉक्टरेट), प्रामाणिक वैज्ञानिक प्रशिक्षणों और क्लिनिकल रिसर्च गतिविधियों का बेहतर समन्वय (AYUSH System Yoga Chhattisgarh) हो सकेगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन आने से योग के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं को अब वैश्विक स्तर की मान्यता और सुविधाएं मिल सकेंगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से प्रदेश के अस्पतालों और वेलनेस सेंटर्स में योग के जरिए मरीजों के इलाज और शोध को एक नई व मजबूत दिशा मिलेगी।



