छत्तीसगढ़

डीएमएफ फंड के दुरुपयोग मामले में कार्रवाई, ईडी का दावा-छाबड़ा को मिला 33 करोड़ रुपये का अवैध कमीशन

रायपुर। प्रदेश के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के कथित दुरुपयोग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रायपुर में पेश किया गया, जहां अदालत ने ईडी को पांच दिन की रिमांड मंजूर की है। ईडी के मुताबिक मामले में आगे की जांच जारी है। ईडी ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि डीएमएफ फंड के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर ईओडब्ल्यू-एसीबी रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच प्रदेश के विभिन्न जिलों को डीएमएफ के तहत मिले करीब 9,188.20 करोड़ रुपये में से एक हिस्से का इस्तेमाल विभिन्न आपूर्ति कार्यों में किया गया।

सप्लाई कार्यों में कमीशन का आरोप

ईडी के अनुसार डीएमएफ की राशि मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी प्राथमिक जरूरतों पर खर्च की जानी थी। आरोप है कि सप्लाई आधारित कार्यों में कथित तौर पर अधिक कीमत और कमीशन की गुंजाइश के चलते राशि का इस्तेमाल इस तरह के कामों में किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि सतपाल सिंह छाबड़ा कथित सिंडिकेट का प्रमुख संपर्क सूत्र और वित्तीय समन्वयक था। उसने ऐसे सप्लाई आधारित डीएमएफ कार्यों की पहचान करने, उन्हें चयनित फर्मों के बीच बांटने, वर्क ऑर्डर जारी कराने और भुगतान में मदद करने में भूमिका निभाई। ईडी के मुताबिक छाबड़ा ने कथित तौर पर विक्रेताओं से कमीशन एकत्र कर सिंडिकेट के सदस्यों के बीच बांटने का काम भी किया।

33 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का दावा

ईडी के अनुसार पीएमएलए की धारा 17 और 50 के तहत बैंकिंग लेनदेन तथा बयानों के विश्लेषण से पता चला कि सतपाल सिंह छाबड़ा को करीब 33 करोड़ रुपये का अवैध कमीशन मिला, जिसे अपराध से अर्जित आय माना जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि यह रकम छाबड़ा, उसके परिवार के सदस्यों, एचयूएफ और उसके नियंत्रण वाली विभिन्न संस्थाओं के खातों में प्राप्त हुई।

बीज निगम के जरिए राशि के इस्तेमाल का आरोप

जांच में ईडी ने दावा किया कि डीएमएफ फंड का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) को मिला। एजेंसी के मुताबिक संपर्क सूत्रों और एजेंटों ने रेट कॉन्ट्रैक्ट धारक कंपनियों के पक्ष में जारी खरीद आदेशों की मूल कीमत का कथित तौर पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन लिया। ईडी का आरोप है कि इस कमीशन का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया, ताकि वर्क ऑर्डर और भुगतान जारी कराने में मदद मिल सके।

पहले भी कई गिरफ्तारियां

डीएमएफ मामले की जांच में ईडी इससे पहले तत्कालीन सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग माया वारियर, तत्कालीन कोरबा कलेक्टर एवं निलंबित आईएएस रानू साहू, सेवा समिति नामक एनजीओ से जुड़े मनोज कुमार द्विवेदी, सूर्यकांत तिवारी और पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। ईडी का आरोप है कि इन लोगों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पसंदीदा फर्मों को डीएमएफ के काम दिलाने और कथित कमीशन व्यवस्था में भूमिका निभाई। ईडी के मुताबिक, खनन से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हित में गठित डीएमएफ ट्रस्टों की राशि का कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों, संपर्क सूत्रों और वेंडरों के संगठित सिंडिकेट ने दुरुपयोग किया। सतपाल सिंह छाबड़ा की गिरफ्तारी इसी जांच की अगली कड़ी मानी जा रही है।

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