संपादकीय

संपादकीय: अब की बार महंगाई की मार


Editorial:
खड़ी संकट के चलते दुनिया के कई देशों की तरह ही अबकी बार भारत पर भी महंगाई की मार पड़ रही है। पिछले 11 दिनों के दौरान चौथी बार भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ा दीए हैं। इस मूल्य वृद्धि के पहले आने वाले खतरे को भांप कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वे पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें। प्रधानमंत्री की इस अपील का उल्टा ही असर हुआ और देशभर में लोग पेट्रोल और डीजल की जमाखोरी करने लगे। पेट्रोल पंपों पर लंबी लंबी कतारें लगने लगी। जरूरत से ज्यादा पेट्रोल और डीजल खरीदने के कारण कई पेट्रोल पंपों में पेट्रोल और डीजल ही खत्म हो गया।

ऐसा पैनिक फैला की लोग परेशान हो गये। बाद में सरकार ने वस्तु स्थिति से देश को अवगत कराया तब कहीं जाकर पेट्रोल पंपों से अनावश्यक भीड़ छटने लगी। इसके बाद तेल कंपनियों ने अपने घाटे का हवाला देते हुए 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में तीन रूपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी। इसके बाद 19 मई को 90 पैसे तथा 23 मई को 87 पैसे की वृद्धि की गई और 25 मई को पेट्रोल के दाम 2.61 तथा डीजल के दाम 2.71 रूपये प्रति लीटर बढ़ा दिये गये। इस तरह लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढऩे से अब मंहगाई भी बढऩे लगी है।

पहले से ही देश की जनता महंगाई की मार से आहत है और अब पेट्रोल व डीजल के दाम बढऩे से माल भाड़ा भी बढ़ेगा तथा यात्री किराये में भी वृद्धि होगी। नतीजतन लोगों का सफर करना भी महंगा होगा और आवश्यक वस्तुओं के दामों में भी भारी वृद्धि होगी। जाहिर है यदि इसी तरह पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ते रहे तो महंगाई अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएगी और लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। यह ठीक है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तथा रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से चलते जंग के कारण पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और इनके दामों में लगातार इजाफा हो रहा है।

अन्य देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम डेढ़ से दो गुना तक बढ़ गये हैं। उनके मुकाबले भारत में बहुत कम मूल्य वृद्धि हुई है लेकिन इस मूल्य वृद्धि से भी लोगों को राहत दी जा सकती है। गौरतलब है कि केन्द्र और राज्य सरकारें पेट्रोल पर भारी टेक्स लगाती हैं यदि सरकारें अपना टेक्स कम करें तो पेट्रोल और डीजल के दाम 15 रूपये तक कम हो सकते हैं। किन्तु सरकारें अपना टैक्स घटाने के लिए तैयार नहीं है नतीजतन इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है और उनका घरेलू बजट गड़बड़ाने लगा है। सरकार को चाहिए कि वह पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स कम करने की दिशा में कारगर कदम उठाए।

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