Kerala CM : केरल में सरकार गठन से पहले तेज हुई खींचतान, कल हो सकता है बड़े नाम का एलान

केरल में चुनाव नतीजे आने के बाद सत्ता बदलने की तस्वीर तो साफ हो गई, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। राजधानी तिरुअनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं के बीच लगातार बैठकों और चर्चाओं का दौर जारी है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी यही सवाल सबसे ज्यादा उठ रहा है कि आखिर नई सरकार की कमान किसे मिलेगी।
यूडीएफ की बड़ी जीत के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह तो है, लेकिन अंदरखाने चल रही खींचतान ने माहौल को थोड़ा उलझा दिया है। कई नेता अपने समर्थकों के साथ सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अगर राज्य स्तर पर सहमति नहीं बनी तो अंतिम फैसला सीधे पार्टी हाईकमान ही करेगा।
तीन बड़े नेताओं के नाम सबसे आगे : Kerala CM
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में फिलहाल तीन प्रमुख नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और केसी वेणुगोपाल शामिल हैं। पार्टी के भीतर इन नामों को लेकर लगातार विचार विमर्श चल रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन ने संकेत दिए हैं कि अगले 24 घंटे के भीतर नए मुख्यमंत्री के नाम का एलान किया जा सकता है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं की निगाहें अब दिल्ली पर टिक गई हैं।
हाईकमान के पाले में गया मामला
सूत्रों के अनुसार राज्य स्तर पर किसी एक चेहरे पर आम सहमति नहीं बन (Kerala CM) पाई है। इसी वजह से फैसला अब कांग्रेस नेतृत्व पर छोड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी मिलकर अंतिम निर्णय लेंगे।
केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी ने भी कहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जल्द फैसला सामने आ जाएगा। पार्टी नेतृत्व पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अंदरूनी खींचतान से बढ़ी चिंता
यूडीएफ की जीत ने कांग्रेस को नई ऊर्जा दी है, लेकिन अंदरूनी राजनीति पार्टी के लिए चिंता का कारण बनती दिख रही है। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और किसी तरह का टकराव नहीं है।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दूसरे राज्यों में शांतिपूर्ण तरीके से सरकार गठन होने के बाद अब कांग्रेस पर भी जल्द फैसला लेने का दबाव (Kerala CM) बढ़ गया है। खासतौर पर कर्नाटक में चल रही अंदरूनी कलह के बाद पार्टी कोई नया विवाद खड़ा नहीं होने देना चाहती।
मुरलीधरन ने भी दिए संकेत
के मुरलीधरन ने बातचीत में अपनी दावेदारी को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह सार्वजनिक तौर पर ज्यादा कुछ नहीं बोलेंगे, लेकिन अपने समर्थकों और क्षेत्र के लोगों की भावना हाईकमान तक पहुंचा चुके हैं।
उन्होंने यह भी माना कि केवल वरिष्ठता ही मुख्यमंत्री बनने का आधार नहीं होती। गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दलों की राय और सहमति भी काफी अहम मानी जाती है।
सभी पक्षों को साधने की कोशिश
कांग्रेस नेतृत्व अब ऐसा चेहरा तलाशने में जुटा है जो संगठन और गठबंधन दोनों को साथ लेकर चल सके। पार्टी नहीं चाहती कि सरकार बनने से पहले किसी तरह का विवाद सामने आए। इसी वजह से मुख्यमंत्री पद पर फैसला काफी सोच समझकर लेने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि रविवार तक तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है।



