
राज्य में खराब सड़कों और अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को लेकर अब सरकार का रुख और सख्त होता दिखाई दे रहा है। लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया कि अब फाइलें दबाकर रखने और काम टालने का दौर (PWD Meeting) नहीं चलेगा। बैठक के बाद विभागीय हलकों में भी यह चर्चा तेज हो गई कि आने वाले दिनों में कई लंबित परियोजनाओं पर तेजी दिखाई जा सकती है।
नवा रायपुर में हुई इस बैठक के दौरान सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार और खराब गुणवत्ता वाले काम सबसे बड़े मुद्दे बने रहे। मानसून करीब आने की वजह से भी विभाग पर दबाव बढ़ गया है। कई जिलों में खराब सड़कों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिसके बाद सरकार ने मॉनिटरिंग और जवाबदेही दोनों बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश PWD Meeting
उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने विभागीय मुख्य अभियंताओं की बैठक में साफ कहा कि प्रशासकीय मंजूरी के बाद तकनीकी स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी काम तय समय सीमा के भीतर शुरू हों और फाइलें लंबे समय तक लंबित न रखी जाएं। बैठक में विभागीय कार्यशैली में बदलाव लाने पर भी जोर दिया गया।
कार्यालयों को कॉर्पोरेट तरीके से चलाने की बात (PWD Meeting)
बैठक के दौरान अधिकारियों को कहा गया कि मुख्य अभियंता कार्यालयों में कामकाज तेज और व्यवस्थित तरीके से होना चाहिए। फील्ड स्तर से लेकर दफ्तर तक नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को हर सप्ताह निरीक्षण करने और प्राथमिकता वाले प्रोजेक्ट्स पर खुद नजर रखने को कहा गया है।
खराब सड़क मिलने पर अफसर भी जिम्मेदार
परफॉर्मेंस गारंटी अवधि वाली सड़कों की खराब हालत पर भी बैठक में सख्त नाराजगी जताई गई। सरकार ने साफ किया कि गारंटी अवधि के दौरान सड़क खराब मिलने पर केवल ठेकेदार ही नहीं, संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने और आम लोगों को परेशानी से बचाने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश से पहले बड़ी चुनौती
प्रदेश में मानसून से पहले करीब 10 हजार किलोमीटर सड़कों की मरम्मत और पैच रिपेयरिंग विभाग के लिए बड़ी (PWD Meeting) चुनौती बनी हुई है। सरकार ने पहले सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में सड़कें खराब हालत में हैं। इनमें लगभग 8 हजार किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं जिनकी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदारों पर है। वहीं करीब 2 हजार किलोमीटर सड़कें सीधे विभाग को सुधारनी हैं।
नई योजना से होगी निगरानी
सरकार अब सड़क रखरखाव के लिए नई व्यवस्था पर भी जोर दे रही है। इसी कड़ी में आउटपुट और परफॉर्मेंस आधारित रोड मेंटेनेंस व्यवस्था लागू की गई है। इसके जरिए सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी है।



