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CG DEO Suspended: चौथी के पेपर में सवाल बना विवाद, सरकार का एक्शन, डीईओ सस्पेंड

महासमुंद में इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। CG DEO Suspended मामले ने स्कूलों से लेकर अभिभावकों तक एक अलग तरह की चिंता खड़ी कर दी है। कई लोग कह रहे हैं कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े सवालों में ऐसी चूक होना गंभीर बात है और जिम्मेदारी तय होना जरूरी था।

ग्राउंड पर बात करने पर अभिभावकों में नाराजगी साफ दिख रही है। CG DEO Suspended को लेकर लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर समय रहते जांच न होती तो मामला और बढ़ सकता था। कुछ लोग इसे शिक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही बता रहे हैं।

कार्रवाई का आधार (CG DEO Suspended)

स्कूल शिक्षा विभाग ने जांच के बाद महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी Vijay Kumar Lahre को निलंबित कर दिया है। मामला चौथी कक्षा की परीक्षा के प्रश्न पत्र से जुड़ा है, जिसमें पूछे गए एक सवाल ने विवाद खड़ा कर दिया था।

क्या था विवादित सवाल

जांच में सामने आया कि प्राथमिक स्कूलों की अर्धवार्षिक परीक्षा के अंग्रेजी पेपर में कुत्ते के नाम के विकल्प के तौर पर शेरू के साथ भगवान राम का नाम भी दिया गया था। इसको लेकर लोगों ने आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

जिम्मेदारी और लापरवाही (CG DEO Suspended)

जारी आदेश में कहा गया कि प्रश्न पत्र तैयार करने, छपाई और वितरण की पूरी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की थी। इसके बावजूद परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सही प्लानिंग नहीं की गई और गंभीर लापरवाही सामने आई। यही वजह रही कि इस तरह का आपत्तिजनक सवाल पेपर में शामिल हो गया, जिससे विभाग की छवि पर भी असर पड़ा।

CG DEO Suspended पर विभाग सख्त

जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी ने अपने कर्तव्यों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। आदेश में उल्लेख है कि कार्य योजना तय नहीं करने और निगरानी में कमी के कारण यह स्थिति बनी। इसके साथ ही पहले के एक मामले में भी समय पर कार्रवाई नहीं करने की बात सामने आई, जिससे विभाग ने इसे और गंभीर माना।

अन्य मामलों में भी लापरवाही (CG DEO Suspended)

जानकारी के अनुसार उच्च न्यायालय से जुड़े एक प्रकरण में भी उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उसमें समय पर जरूरी कदम नहीं उठाए गए। यहां तक कि विधि शाखा की ओर से दी गई सूचना को भी नजरअंदाज किया गया। इससे साफ हुआ कि आदेशों का पालन नहीं किया गया और मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।

वित्तीय अनियमितता भी सामने

अंकेक्षण रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि उनके कार्यकाल के दौरान विभागीय खातों में कई तरह (CG DEO Suspended) की गड़बड़ियां थीं। इससे विभाग ने इसे केवल एक गलती नहीं बल्कि लगातार लापरवाही का मामला माना।

नियमों के खिलाफ आचरण

आदेश में कहा गया कि अधिकारी का व्यवहार सेवा नियमों के विपरीत है और यह गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, मनमाना रवैया और अनुशासनहीनता के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

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