
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को शिक्षा से जुड़े मुद्दों ने राजनीतिक तापमान (Guest Teachers Regularization CG) बढ़ा दिया। स्कूलों के युक्तियुक्तकरण और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायकों के सवालों के घेरे में भी नजर आए। सदन में उठे सवालों के बीच मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने अंततः वॉकआउट कर दिया, जिससे मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिखा।
युक्तियुक्तकरण पर अपने ही विधायकों ने उठाए सवाल
सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर चिंता जताई। कुछ विधायकों ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के बाद कई स्कूलों में व्यवस्थाएं कमजोर हो गई हैं, यहां तक कि मूलभूत सुविधाओं के लिए भी दिक्कतें सामने आ रही हैं। इस पर शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि जहां भी शिकायतें हैं, वहां जांच कराई जाएगी और आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
10 हजार से ज्यादा स्कूलों में बदलाव, लेकिन सवाल बरकरार
मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया (Guest Teachers Regularization CG) गया है। इनमें से अधिकांश भवनों का उपयोग स्मार्ट स्कूल और लैब के रूप में किया जा रहा है, हालांकि कुछ स्कूल अब भी उपयोग से बाहर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन स्कूलों की हालत जर्जर है, वहां चरणबद्ध तरीके से नवीनीकरण कराया जाएगा।
अतिथि शिक्षकों का मुद्दा बना सबसे बड़ा विवाद
सदन में असली टकराव तब देखने को मिला जब विपक्ष ने अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण, वेतन और भर्ती का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने सरकार पर वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नियमितीकरण का आश्वासन अब तक अधूरा है। इस पर मंत्री ने जवाब दिया, लेकिन विपक्ष उसे संतोषजनक नहीं मान सका।
जवाब से असंतोष, सदन से बाहर निकला विपक्ष
लगातार सवाल-जवाब और बहस के बाद विपक्ष ने मंत्री के जवाब को अधूरा बताते हुए सदन से वॉकआउट (Guest Teachers Regularization CG) कर दिया। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि शिक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में सियासी बहस का केंद्र बना रह सकता है।
अब नजर फैसलों पर, नहीं तो बढ़ेगा विवाद
शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उठे सवालों ने सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाती है या फिर यह विवाद आगे और गहराता है।



