संपादकीय

संपादकीय: टीएमसी की ताबूत में आखिरी किल


Editorial: बंगाल विधानसभा चुनाव में तो तृणमूल कांग्रेस का खेला पहले ही खत्म हो चुका है और रही सही कसर टीएमसी के गढ़ में पूरी हो गई जहां फाल्दा विधानसभा में कराएं गये पुनर मतदान में भाजपा प्रत्याशी देवांसू पांडा ने एक लाख नौ हजार वोटों से जीत दर्ज करके एक नया इतिहास रच दिया। बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी शुरू से यह दावा कर रहे थे कि फाल्दा में भाजपा एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी और उनका यह दावा सच साबित हुआ।

यहां से टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान को मात्र सात हजार वोट मिले जब िउनसे ज्यादा कांग्रेस को 10 हजार वोट और सीपीएम को चालीस हजार वोट मिले। इस तरह भाजपा ने यहां से एकतरफा जीत हासिल की कांग्रेस और टीएमसी की जमानत जब्त हो गई। फाल्दा विधानसभा सीट में हुए पुनर मतदान में 88 प्रतिशत वोट पड़े जिनमें से 96 प्रतिशत हिन्दुओं के वोट भाजपा को मिले वहीं मुस्लिमों ने 72 प्रतिशत मतदान किया जो सीपीएम कांग्रेस और टीएमसी में बंट गया।

हालांकि मतदान के दो दिन पहले ही जहांगीर खान ने चुनाव से अलग हटने की घोषणा कर दी थी क्योंकि उन्हें पता चल गया था कि इस बार उनका खेला खत्म होने वाला है अब तो जहांगीर खान पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। बहरहाल भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार फाल्दा में हिन्दुओं के सत प्रतिशत वोट भाजपा के पक्ष में गये हैं और ये आकंड़े विपक्ष की नींद उड़ा रहे हैं जो जाति की राजनीति करते रहे हैं लेकिन फाल्दा में हिन्दुओं ने एकजुट होकर भाजपा के पक्ष में मतदान कर विपक्ष की पेशानी पर बल डाल दिया है।

यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के सुप्रीमों अब भंडारे में पूरी सब्जि बांटने पर मजबूर हो गये हैं। उत्तरप्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं लेकिन वहां बंगाल विधानसभा चुनाव तथा फाल्दा पुनरमतदान का असर पडऩा तय है। रही बात टीएमसी की तो फाल्दा में मिली करारी हार टीएमसी की ताबूत में आखिर कील साबित होगी। इस चुनाव के बाद टीएमसी सुप्रीमों ममता बनर्जी ने फिर वहीं पुराना राग अलापा है कि चुनाव में वोटों की चोरी की गई है।

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