संपादकीय: भारत ने ढूंढा आपदा में अवसर

Editorial: मिडिल ईस्ट में बिगड़ते हालातों के बीच एक ओर जहां दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था लडखड़ाने लगी है वहीं भारत ने इस आपदा की घड़ी में भी अपने लिए अवसर ढूंढ निकाला है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच दिवसीय विदेश यात्रा के दौरान 40 अरब डॉलर का निवेश जुटाकर दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि आने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जाता है जो विपक्षी पार्टियां पीएम मोदी के विदेश दौरे का यह कहकर मजाक उडा रही थी कि एक ओर तो पीएम मोदी देशवासियों से विदेश न जाने की अपील कर रहे थे और खुद वे ही विदेश यात्रा पर चले गये हैं। इन विपक्षी दलों के मुंह पर चालीस अरब डॉलर का निवेश एक करारा तमाचा है।
पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात से समझौता कर पांच अरब डॉलर का निवेश जुटाया वहीं यूरोपीय देशों के दौरे के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाईड्रोजन और एआई जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने के लिए पचास से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ समझौता किया। पीएम मोदी की यह विदेश यात्रा विपदा की इस घड़ी में भारतीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान करेगी। वैसे भी खाड़ी संकट के चलते भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जहां इसका सबसे कम असर पड़ा है।
अन्य देशों में तो पेट्रोल डीजल और रसोई गैस के दाम कई गुना बढ़ गये लेकिन भारत में सिर्फ 3 रूपये की मामूली वृद्धि ही की गई है। बहरहाल भारत के सामने भी आगे चलकर विकट स्थिति निर्मित हो सकती है इसलिए सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। विदेश दौरे से लौटते ही पीएम मोदी ने मंत्री परिषद की आपात बैठक बुलाई और पश्चिम एशिया संकट को लेकर हर सतर पर तैयारी करने के निर्देश दिए उन्होंने सभी विभागों को अपने अनावश्यक खर्चों में कटौती को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए कहा तथा इस मामले में पूरी संवेदनशीलता और सर्तकता बरतने के लिए निर्देशित किया।
बैठक में उन्होंने कहा कि इस संकट की घड़ी में भी भारत मजबूती के साथ खड़ा आगे बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता है। वास्तव में अब आगे देश को फूंक फुंक कदम रखना होगा तभ इस संकट से निपटने में हम सफल होंगे। भारत ने कोरोना काल के दौरान वैश्विक संकट के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को बरकरार रखा था और पूरा देश उस संकट के दौर में एकजुट रहा था वैसी ही एकजुटता हमें फिर दिखानी होगी और सरकार के साथ ही हमें भी अपने अनावश्यक खर्चों में कटौती करनी होगी तभी भारत आने वाली चुनौतियों से निपटने में कामयाब हो पाएगा।



