संपादकीय

संपादकीय: क्या चंदा चोरी बनेगा चुनावी मुद्दा


Editorial: अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी के बहुचर्चित मामले को लेकर विपक्षी पार्टियों ने सियासत शुरू कर दी है। ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव में चंदा चोरी के मामले को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कवायद कर रही है।

गौरतलब है कि जब बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिराया गया था और वहां राम मंदिर बनाने की घोषणा की गई थी तब उत्तरप्रदेश की तात्कालीन भाजपा सरकार बख्र्शात कर दी गई थी और भाजपा को अन्य चुनावों में भी इसका खामिजयाजा भुगतना पड़ा था। यह भी एक संयोग है कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो गया और उसका लोकार्पण भी हो गया तो उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में सीटों का भारी नुकसान हुआ।

यहां तक की अयोध्या की सीट भी भाजपा हार गई। समाजवादी पार्टी ने सर्वाधिक 37 सीटें जितने का नया रिकॉर्ड कायम कर लिया था। यही वजह है कि अब विपक्ष उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में चंदा चोरी के मामले को जोर शोर से उछालने की कवायद कर रहा है ताकि इससे भाजपा की क्षवि धुमिल हो और समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के महागठबंधन को इसका चुनावी लाभ मिले। यही वजह है कि सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव लगातार चंदा चोरी के मामले को लेकर योगी सरकार और भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस पार्टी भी इस बारे में अपने ट्विटर हैंडल पर रोज एक नया मीम जारी कर रही है।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तो अयोध्या ही हो आये हैं और उन्होंने बयान दिया है कि जब तक चंदा चोरों को फांसी की सजा नहीं दे दी जाती तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। इस मामले में अस्सद्दुदीन ओवैसी ने मुस्लिम कार्ड खेल दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि राम मंदिर ट्रस्ट में कोई मुस्लिम भी होता तो अब तक उसका एंकाउंगटर हो गया होता और उसके घर पर बुलडोजर चल गया होता और चोरी का सारा मामला उसके सिर पर ही थोप दिया जाता। चंदा चोरी के मामले को लेकर विपक्ष जिस तरह हमलावार है उसे देखते ही यह साफ नजर आ रहा है कि वे इसे उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव तक लंबा खींचेंगे।

शिवसेना युबीटी के नेता संजय राउत ने तो यह भी कहा है कि जल्द ही उद्धव ठाकरे राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव सहित इंडी गठबंधन के अन्य नेता अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन करने जाएंगे। ऐसा होगा या नहीं यह तो पता नहीं लेकिन यह तय है कि अब इस मुद्दे को विपक्ष ने हवा देने की तैयारी कर ली है। यह बात अलग है कि उसे इसका कितना राजनीतिक फायदा मिलेगा यह तो आने वाला वक्त ही बेहतर बताएगा। विपक्ष के इन आरोपों का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न सिर्फ जवाब दे रहे हैं बल्कि उनके रवैये पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ को पता है कि यूपी विधानसभा चुनाव में उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी से ही होना है इसलिए वे समाजवादी पार्टी पर ही जमकर निशाना साध रहे हैंं। उनको तो समाजवादी पार्टी ने चंदा चोरी का मामला उठाकर फिर से गड़े मुर्दे उखाडऩे का सुनहरा अवसर दे दिया है और अब वे सवाल कर रहे हैं कि जिन लोगों की भगवान श्रीराम में कोई आस्था ही नहीं थी और जिन लोगों ने राम भक्तों पर गोलियां चलवाई थी वे अब राम भक्त बनने का ढोंग रच रहे हैं।

जाहिर है योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर इसका विरोध करने वाली पार्टियों को आड़े हाथों ने लेने का मौका लेने का मौका मिल गया है और वे इसे छोडऩे वाले नहीं है। देखना दिलचस्प होगा कि यदि विपक्ष उत्तरप्रदेश विधानसभा के होने वाले चुनाव में चंदाचोरी के इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाता है तो इसका कितना लाभ विपक्ष को मिलता है और कितना लाभ भाजपा को पहुंचता है।

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