छत्तीसगढ़

इतिहास की छांव में आज भी जी रहा धमतरी का यह गांव

सिर्फ पेड़ नहीं, गांव की विरासत : 200 वर्षों से ग्रामीणों के सुख-दुख का साथी बना पीपल पेड़

राजेश रायचुरा
धमतरी/नवप्रदेश।
आधुनिकता की दौड़ में जहां एक ओर विकास के नाम पर हरियाली की बलि दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर धमतरी जिले के ग्राम भोथली में ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश की है। ग्राम भोथली के हृदय स्थल पर स्थित एक ऐतिहासिक पीपल का पेड़ पिछले 200 से अधिक वर्षों से न सिर्फ गांव की पहचान बना हुआ है, बल्कि ग्रामीणों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र भी है।

हब और बुजुर्गों की चौपाल: समय के साथ यह क्षेत्र अब एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र (बिजनेस हब) के रूप में भी विकसित हो चुका है। पेड़ के आसपास इलेक्ट्रॉनिक दुकानें, टेलरिंग शॉप और आटा चक्की जैसी कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। खास बात यह है कि इस भीषण गर्मी और दोपहर के समय यह पेड़ दुकानदारों, ग्राहकों और राहगीरों के लिए वरदान साबित होता है। आज भी गांव के बुजुर्ग और युवा यहां बैठकर चौपाल लगाते हैं, जहां गांव के विकास से लेकर हर सुख-दुख पर चर्चा होती है।

पुरखों की धरोहर को आज भी संजोए हैं ग्रामीण
ग्राम भोथली निवासी मनमोहन तेलासी ने बताया कि यह पीपल का वृक्ष उनके दादा-परदादाओं के जमाने का है, जिसकी उम्र 200 वर्ष से भी अधिक आंकी गई है। ग्रामीणों ने इस धरोहर को आज भी पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित रखा है। गांव का मुख्य चौक होने के कारण इसे गांव का ‘हृदय स्थल माना जाता है। इस पेड़ के नीचे पंचायत द्वारा एक चबूतरा भी बनाया गया है, जो वर्तमान में जर्जर स्थिति में है, लेकिन ग्रामीण भविष्य में इसके नवनिर्माण के लिए प्रयासरत हैं।

वैज्ञानिक महत्व: ऑक्सीजन का अटूट स्रोत: ग्रामीणों के अनुसार, इस पेड़ का केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि बड़ा वैज्ञानिक महत्व भी है। यह वृक्ष निरंतर भारी मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है, जिससे आसपास का वातावरण सदैव शुद्ध और ऊर्जावान बना रहता है। पक्षियों के लिए भी यह एक सुरक्षित आश्रय स्थल है। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर इस पेड़ को कटने नहीं देंगे और अपने पुरखों द्वारा लगाए गए इस जीवनदायिनी वृक्ष की सेवा निरंतर करते रहेंगे।

सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का केंद्र
यह ऐतिहासिक स्थल गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का साक्षी रहा है। पेड़ से ही लगा हुआ गांव का ‘रामलीला चौकÓ है, जहां वर्षों से रात्रि कालीन नाटकों और रामलीला का आयोजन होता आया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं को वृक्षों में पीपल बताया है। इसी आस्था के चलते ग्रामीण इस वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास मानते हैं और प्रतिदिन शाम को पेड़ के समीप दीपदान कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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