छत्तीसगढ़

Thermal Plant : राखड़ डैम फूटने के बाद अब बड़ी मार, थर्मल संयंत्र पर फिर लगा करोड़ों का जुर्माना

कोरबा में हसदेव थर्मल पावर प्लांट को लेकर एक बार फिर हलचल तेज (Thermal Plant) हो गई है। राखड़ डैम टूटने के मामले में लगातार दूसरी कार्रवाई के बाद इलाके में लोगों के बीच संयंत्र प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और किसानों के बीच भी नदी के पानी को लेकर चिंता बनी हुई है। मामले की चर्चा प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर बिजली विभाग तक में होती रही।

घटना के बाद प्रभावित इलाके में कई दिनों तक हालात सामान्य नहीं हो पाए थे। राख मिश्रित पानी बहने की खबर सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ी थी। अब दूसरी बार भारी जुर्माना लगने से पूरे मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है।

सिंचाई विभाग ने लगाया 20 करोड़ से ज्यादा जुर्माना : Thermal Plant

झाबू नवागांव राखड़ डैम फूटने के मामले में सिंचाई विभाग ने हसदेव थर्मल पावर प्लांट पर 20.34 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। विभाग का कहना है कि राख मिश्रित पानी से हसदेव नदी का पानी प्रभावित हुआ।

इससे पहले मार्च महीने में भी डैम में रिसाव की घटना के बाद करीब 18 करोड़ रुपए का दंड लगाया गया था। तीन महीने के भीतर दूसरी बार हुई कार्रवाई से संयंत्र की रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

राख मिश्रित पानी बैराज तक पहुंचा

बताया गया कि 19 अप्रैल को राखड़ डैम में दरार आने के बाद बड़ी मात्रा में राख मिला पानी हसदेव दर्री बैराज तक पहुंच गया था। स्थिति बिगड़ने पर बैराज के गेट लगातार पांच दिनों तक खोलकर पानी को नदी में छोड़ा गया। इस पूरी घटना में करीब 4.52 मिलियन घन मीटर पानी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

नियमों के आधार पर तय हुआ दंड

हसदेव दर्री बैराज के अधिकारियों के मुताबिक बिजली उत्पादन कंपनी और सिंचाई विभाग के बीच पहले से हुए अनुबंध में जल कर शुल्क (Thermal Plant) तय है। नियमों के अनुसार तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी प्रावधान के तहत 20.34 करोड़ रुपए का दंड निर्धारित किया गया है।

दो बड़ी इकाइयां अब भी बंद

डैम फूटने की घटना के बाद संयंत्र की यूनिट तीन और यूनिट चार को बंद करना पड़ा था। 210 210 मेगावाट क्षमता वाली दोनों इकाइयों में पिछले 24 दिनों से बिजली उत्पादन बंद है। मरम्मत का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है और उत्पादन शुरू होने को लेकर भी स्थिति साफ नहीं बताई जा रही।

अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई

मामले में उत्पादन कंपनी के उच्च प्रबंधन ने अधीक्षण अभियंता को हटाकर रायपुर भेज दिया है। वहीं सहायक अभियंता सिकरेल कंवर और कार्यपालन अभियंता नारायण पटेल को निलंबित (Thermal Plant) किया गया है। जांच कमेटी ने प्राथमिक तौर पर उत्पादन कंपनी की लापरवाही को जिम्मेदार माना है। हालांकि रखरखाव करने वाली ठेका कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

बढ़ती बिजली मांग के बीच चिंता

प्रदेश में इस बार बिजली की मांग 7200 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। पिछले साल की तुलना में बिजली खपत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भीषण गर्मी के बीच दो बड़ी इकाइयों के बंद होने से बिजली उत्पादन पर असर पड़ रहा है और आगे स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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