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Terror Module Underworld : कराची से रची जा रही थी बड़ी साजिश, लेकिन ऐन वक्त पर खुली ऐसी परत कि एजेंसियां भी रह गईं सतर्क

देश की सुरक्षा एजेंसियों की हालिया कार्रवाई के बाद एक ऐसे नेटवर्क की परतें खुल (Terror Module Underworld) रही हैं, जिसने जांच अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। अलग अलग राज्यों से संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि देश के भीतर एक नए आपराधिक और कट्टरपंथी नेटवर्क को खड़ा करने की कोशिश चल रही थी, जिसकी गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी।

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले के तार सीधे पाकिस्तान में बैठे उन लोगों से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं, जो लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी निगरानी और तेज कर दी है।

कराची से संचालित हो रहा था नेटवर्क : Terror Module Underworld

जांच में सामने आया है कि इस मॉड्यूल का संचालन कथित तौर पर दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले मुन्ना झिंगाड़ा द्वारा किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि उसने कराची में एक सुरक्षित ठिकाना बना रखा था और वहीं से संपर्क बनाए हुए था।

सूत्रों के मुताबिक वीडियो कॉल और अन्य माध्यमों से भारत में मौजूद अपने संपर्कों के साथ लगातार संवाद किया जा रहा था। एजेंसियों को संदेह है कि नेटवर्क को संगठित करने और नए लोगों को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।

पूछताछ में हुए कई अहम खुलासे

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों ने गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद की मांग भी की थी।

सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्धों तक नशीले पदार्थ पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। एजेंसियां अब इस पूरे आर्थिक और आपराधिक तंत्र की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

हथियारों की आपूर्ति को लेकर भी जांच

जांच अधिकारियों को ऐसे इनपुट मिले हैं कि सीमावर्ती इलाके में हथियार और विस्फोटक सामग्री पहुंचाने की कोशिश की गई थी। इस पहलू को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलग से जांच कर रही हैं और संबंधित लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि के लिए तकनीकी और भौतिक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।

अंडरवर्ल्ड में नई सक्रियता की आशंका

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का मानना है कि पुराने आपराधिक नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश (Terror Module Underworld) की जा सकती थी। इसी वजह से कुछ पुराने चेहरों और उनके संपर्कों पर विशेष नजर रखी जा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद कुछ लोग इस नेटवर्क को मजबूत करने में भूमिका निभा रहे थे। एजेंसियां इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं।

फरार संदिग्धों की तलाश जारी

मामले में कुछ संदिग्ध अभी भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ कई और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां नेटवर्क की पूरी संरचना, फंडिंग और संपर्कों की पड़ताल में जुटी हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

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