संपादकीय: एक और नई राजनीतिक पार्टी

Editorial: दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में सबसे आसान काम है राजनीतिक पार्टी बनाना और अपनी राजनीति चमकाना। भारत में वैसे तो सिर्फ छह राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां हैं और 59 राज्य स्तरीय राजनीतिक दल हैं जिन्हें चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त है। इसकेे अलावा लगभग ढाई हजार पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त पार्टियां हैं। जो चुनाव के दौरान ही सक्रियता दिखाती हैं और अपनी दुकानदारी चलाती हैं। ऐसी गैर मान्यता प्राप्त पार्टियां कुकुरमुत्तों की तरह उगती ही जा रही हैं। इसी कड़ी में एक और नई राजनीतिक पार्टी का अभ्युदय हुआ है।
उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी की नई गाइडलाइन के विरोध में अपने पद से त्यागपत्र देकर राजनीति के क्षेत्र में पदार्पण किया है और अपनी एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। जिसका नाम राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा रखा है। इसे संक्षिप्त नाम “राम” दिया गया है। उनका दावा है कि यह पार्टी सनातन मूल्यों, भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का संरक्षण कर सही मायनों में रामराज्य स्थापित करेगी। अलंकार अग्निहोत्री ने ऐसे समय पर नई पार्टी बनाई है जब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का चुनाव निकट आ रहा है।
यूजीसी की नई गाइडलाइन को लेकर सवर्ण समाज गुस्से से उबल रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी की नई गाइडलाइन पर रोक लगा रखी है लेकिन सरकार ने कभी तक इसे रद्द करने की घोषणा नहीं की है। नतीजतन सवर्ण समाज इसके खिलाफ आंदोलित है। सवर्ण आर्मी के बैनर तले नई दिल्ली के जंतरमंतर पर यूजीसी के विरोध में धरना प्रदर्शन भी हुआ। अब तो सवर्ण समाज यूजीसी के साथ ही एससी- एसटी एक्ट ही नही बल्कि जातीय आधार पर आरक्षण को भी खत्म करने की मांग कर रहा है।
सवर्ण समाज जिसे भाजपा का वोट बैंक माना जाता रहा है उसका भाजपा से मोहभंग होना राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा जैसे नये वाले राजनीतिक दल के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग नई पार्टी के गठन का स्वागत कर रहे हैं और इससे जुड़ भी रहे हैं वहीं दूसरी ओर लोग अलंकार अग्निहोत्री को दूसरा अरविंद केजरीवाल और प्रशांत किशोर बताकर उनका उपहास भी उड़ा रहे हैं। उन्हें अवसरवादी बता रहे हैं।
बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि राम नाम धारी यह नई राजनीतिक पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में क्या भूमिका निभाती है? या इसका भी हश्र बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज की तरह होगा जो अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी और सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।



