Bilaspur High Court : बेटे की मौत के बाद पिता ने उठाया बड़ा सवाल, कुत्ता काटने पर मुआवजा क्यों नहीं

बिलासपुर हाई कोर्ट में पहुंचे एक मामले ने अब आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और सरकारी नियमों को लेकर नई बहस (Bilaspur High Court) खड़ी कर दी है। बेटे को खो चुके पिता की याचिका के बाद अदालत ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान यही सवाल गूंजता रहा कि अगर दूसरे हादसों में मुआवजा मिलता है तो कुत्ते के काटने से मौत होने पर राहत क्यों नहीं दी जाती।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच यह मामला सामने आने के बाद सरकारी अमले में भी हलचल बढ़ गई है। अदालत ने राज्य सरकार से साफ जवाब मांगा है। मामले को लेकर अब लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए।
बेटे की मौत के बाद हाई कोर्ट पहुंचे पिता : Bilaspur High Court
याचिकाकर्ता धीरज पारधी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि कुत्ते के काटने से उनके बेटे की मौत हो गई। उन्होंने बेटे की मौत पर चार लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की वेकेशन कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता ने पक्ष रखा।
सरकार ने बताया मुआवजे का प्रावधान नहीं
राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि कुत्ते के काटने से मौत होने की स्थिति में फिलहाल मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदा, सांप बिच्छू के काटने या जंगली जानवरों के हमले में मौत होने पर राहत राशि देने का नियम जरूर मौजूद है।
हाई कोर्ट ने चीफ सिकरेट्री से मांगा जवाब
मामले को गंभीर मानते हुए हाई कोर्ट ने चीफ सिकरेट्री को नोटिस जारी (Bilaspur High Court) किया है। अदालत ने शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि किन नियमों और प्रावधानों के तहत याचिकाकर्ता को राहत दी जा सकती है। साथ ही आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी गंभीरता
आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम Court पहले ही स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। देशभर के हाई कोर्ट को भी जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। बताया गया कि हर महीने रिपोर्ट भी मांगी जा रही है। ऐसे में बिलासपुर हाई कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी तलब की है।
जानिए किन मामलों में मिलता है मुआवजा
राज्य में प्राकृतिक आपदा, डूबने, सांप या बिच्छू के काटने, आग में जलने, बिजली गिरने और दूसरी कई घटनाओं में चार लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान (Bilaspur High Court) है। इसी नियम का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कुत्ते के काटने से हुई मौत को भी राहत प्रावधान में शामिल किया जाए।



