छत्तीसगढ़शहर

डिजिटल कृषि से जमाखोरों पर सर्जिकल स्ट्राइक

बिना एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं मिलेगी खाद, सॉफ्टवेयर तय करेगा कोटा

खाद की कालाबाजारी पर लगेगा ब्रेक: छत्तीसगढ़ में फार्मर आईडी और ई-वितरण प्रणाली लागू

वैश्विक संकट के बीच साय सरकार का ‘सुरक्षा कवच

एग्रीस्टेक पोर्टल से तय होगा खाद का कोटा, गड़बड़ी करने वालों पर गिरेगी गाज

हेमंत धोटे
रायपुर/नवप्रदेश। (Surgical strike on hoarders through digital agriculture)
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण पैदा हुए वैश्विक संकट के बीच भारत सरकार और छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार पूरी तरह ‘अलर्ट मोड पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंका को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं के लिए एक अभेद्य ‘सुरक्षा कवचÓ तैयार कर लिया है। आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए राज्य में खाद-बीज का स्टॉक फुल है और किसानों को किसी भी तरह की किल्लत नहीं होने दी जाएगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री भी सख्त-जमाखोरों पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक
खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए जिला स्तर पर उडऩदस्तों (स्क्वाड) और निरीक्षकों को तैनात कर दिया गया है। ये टीमें फील्ड पर जाकर हर दिन की सप्लाई और स्टॉक की रिपोर्ट शासन को भेजेंगी। उधर नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी एक उच्चस्तरीय बैठक कर साफ कर दिया है कि वैश्विक संकट का असर देश के किसानों पर नहीं पडऩे दिया जाएगा। केंद्रीय स्तर पर एक ‘विशेष सेल बनाया गया है जो हर हफ्ते खाद-बीज की मॉनिटरिंग रिपोर्ट सीधे मंत्री को सौंपेगा। केंद्र सरकार ने देशभर के लिए 62 लाख टन यूरिया और 25 लाख टन डीएपी का प्रबंध कर लिया है।

कालाबाजारी या अवैध भंडारण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा
कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने
प्रदेश के किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से खाद-बीज की उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। एक-एक पंजीकृत किसान को समय पर खाद मिलेगी, लेकिन कालाबाजारी या अवैध भंडारण करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
दो बड़े ऐतिहासिक सुधार
इस बार खरीफ सीजन से छत्तीसगढ़ में ‘नवीन ई-उर्वरक वितरण प्रणालीÓ लागू होने जा रही है। इसके तहत खाद वितरण व्यवस्था में दो बड़े ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं।
एग्रीस्टेक पोर्टल : अब केवल उन्हीं किसानों को रासायनिक उर्वरक मिलेगा, जिनका पंजीकरण एग्रीस्टेक पोर्टल पर होगा। कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने इसके लिए पीएम किसान पोर्टल के डेटा को तेजी से माइग्रेट करने और सभी सात जिलों के कलेक्टरों को युद्ध स्तर पर पंजीकरण पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सॉफ्टवेयर तय करेगा कोटा: खाद का वितरण अब किसी के अनुमान पर नहीं, बल्कि पोर्टल पर दर्ज किसान के वास्तविक रकबे (भूमि धारिता) और बोई जाने वाली फसल के आधार पर सॉफ्टवेयर द्वारा तय किया जाएगा। पारदर्शिता के लिए शत-प्रतिशत किसानों को विशिष्ट पहचान पत्र दिए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ में खाद का फुलपु्रफ ब्लूप्रिंट और वर्तमान स्टॉक
केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया है। राज्य ने अग्रिम भंडारण तेज कर दिया है और 30 मार्च तक गोदामों में 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद का सुरक्षित स्टॉक जमा किया जा चुका है।

छत्तीसगढ़ में उर्वरक उपलब्धता की वर्तमान स्थिति (30 मार्च तक)
नाम लक्ष्य वर्तमान उपलब्धता
यूरिया:
आवंटित लक्ष्य 7.25 लाख मीट्रिक टन (वर्तमान उपलब्धता: 2.43 लाख मीट्रिक टन)
डीएपी: आवंटित लक्ष्य 3.00 लाख मीट्रिक टन (वर्तमान उपलब्धता: 1.05 लाख मीट्रिक टन)
एनपीके: आवंटित लक्ष्य 2.50 लाख मीट्रिक टन (वर्तमान उपलब्धता: 1.69 लाख मीट्रिक टन)
एसएसपी: आवंटित लक्ष्य 2.00 लाख मीट्रिक टन (वर्तमान उपलब्धता: 1.78 लाख मीट्रिक टन)
एमओपी: आवंटित लक्ष्य 0.80 लाख मीट्रिक टन (वर्तमान उपलब्धता: 0.50 लाख मीट्रिक टन)

यूरिया का सस्ता और जैविक विकल्प: ‘नील हरित काई और ‘नैनो यूरिया का जादू
रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने और किसानों की लागत घटाने के लिए सरकार आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है।
नील हरित काई : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से अप्रैल से कृषि विज्ञान केंद्रों और सरकारी उद्यानों में इसके ‘मदर कल्चरÓ का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो रहा है। यह तकनीक हवा से नाइट्रोजन सोखकर धान की फसल को प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व देगी।
नैनो फर्टिलाइजर्स: कम खर्च में अधिक पैदावार के लिए नैनो यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और इसके लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

हरी खाद: मृदा स्वास्थ्य (मिट्टी की सेहत) सुधारने के लिए ढेंचा और अन्य दलहनी फसलों के लिए मंडी निधि से विशेष बजट स्वीकृत किया गया है। इसके साथ ही सुगंधित धान, मखाना, मसाला और ऑयल पाम जैसी फसलों के विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है।

किसानों के लिए सलाह
खरीफ 2026 के लिए खाद की कोई किल्लत नहीं है। किसानों से अपील की गई है कि वे घबराकर जरूरत से ज्यादा भंडारण न करें। खाद व अन्य सरकारी लाभ सुचारू रूप से पाने के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से जल्द से जल्द कराएं और यूरिया के खर्च को कम करने के लिए नैनो यूरिया व नील-हरित काई जैसे विकल्पों को अपनाएं।
भारत में यूरिया का उत्पादन कम, खपत ज्यादा
सालाना खपत: करीब 400 लाख मीट्रिक टन।
घरेलू उत्पादन: करीब 300 लाख मीट्रिक टन।
खाद की कमी: लगभग 100 लाख मीट्रिक टन।

इंपोर्ट पर खर्च: यूरिया की कमी को पूरा करने के लिए भारत पूरी तरह इम्पोर्ट पर निर्भर है। 2025 में भारत ने यूरिया आयात पर करीब 20 हजार करोड़ खर्च किए।

वैकल्पिक रास्तों से मंगाया जा रहा यूरिया
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण पैदा हुए संकट को देखते हुए सरकार ने 2026 के लिए 25 लाख टन यूरिया के आयात को मंजूरी दी है। यह सप्लाई ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते को छोड़कर अल्जीरिया, नाइजीरिया, ओमान और रूस से सीधे मंगवाई जा रही है।
भारत-रूस मिलकर यूरिया फैक्ट्री लगाएंगे

अभी जरूरत का 71′ यूरिया मिडिल-ईस्ट से आता है। ईरान जंग के कारण पैदा हुए यूरिया संकट के बीच भारत और रूस ने जॉइंट वेंचर में फर्टिलाइजर प्लांट लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी हैं। यह प्लांट रूस के समारा में लगाया जा रहा है, जो अगले दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इसे लेकर हाल ही में एक भारतीय दल ने रूस का दौरा किया है। भारत और रूस के इस साझा प्रोजेक्ट में करीब 20 हजार करोड़ रुपए का निवेश होना है। रूस में लगने वाले 20 लाख टन क्षमता के यूरिया प्रोजेक्ट में इंडियन पोटाश लिमिटेड, आरसीएफ और एनएफएल शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत खाद के आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है।

मिडल-ईस्ट पर निर्भरता कम करने की तैयारी
भारत अपनी खेती के लिए नाइट्रोजन आधारित खाद यूरिया पर बहुत ज्यादा निर्भर है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का करीब 71′ यूरिया मिडल-ईस्ट के देशों से आयात करता है।

भारत की 3 सरकारी कंपनियां प्रोजेक्ट में शामिल
भारतीय कंपनियां इंडियन पोटाश लिमिटेड, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड मिलकर 10 हजार करोड़ का निवेश करेंगी। बाकी के 10 हजार करोड़ रूस की केमिकल कंपनी ‘यूरालकेम ग्रुपÓ लगाएगी।

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