सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका,… सिंघवी ने दिया था ये तर्क

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जगदलपुर/नवप्रदेश। सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने झीरमकांड केस (Jheeram Case) में गवाहों के परीक्षण (Trial of witnesses) की छत्तीसगढ़ सरकार (cg Government) की याचिका को खारिज (Dismiss the petition) कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2020 को छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका पर सुनवाई की तिथि नियत की थी । 29 सितंबर को सुको ने याचिका को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका खारिज की है 2013 में हुए झीरम घाटी नक्सली हमले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग द्वारा अतिरिक्त गवाहों की जांच से इनकार किया गया था । राज्य सरकार ने मामले में अतिरिक्त गवाहों की जांच के लिए विशेष न्यायिक जांच आयोग को निर्देश देने संबंधी छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेशों को चुनौती दी थी।

25 मई 2013 को नक्सलियों ने बस्तर जिले के दरभा इलाके में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं के एक काफिले पर हमला किया था । इस हमले में करीब 31 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें तत्कालीन कांग्रेस प्रमुख नंद कुमार पटेल , पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल शामिल थे ।

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी दिया था यह तर्क

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा कहा गया था कि आयोग ने 6 महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही दर्ज करने के अनुरोध को खारिज कर दिया था और जांच बंद कर दी थी। आयोग ने जंगल वारफेयर ट्रेनिंग स्कूल, कांकेर के निदेशक बी के पंवार को विशेषज्ञ के रूप में अपने साक्ष्य दर्ज करने के लिए बुलाने से इनकार कर दिया था और उनकी जांच करने और कार्यवाही बंद करने की राज्य की प्रार्थना को खारिज कर दिया ।

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