आपदा में अवसर… कहीं रामकृष्ण अस्पताल पर बरस तो नहीं रही अफसरों की कृपा!

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10 लाख अनुमानित बिल मामले में सीएमएचओ मीरा बघेल बोलीं- अस्पताल ने अब चार लाख कुछ के बिल का ब्योरा भेजा है, इससे हम संतुष्ट, पर नहीं बताया ब्योरे में क्या   

रायपुर/नवप्रदेश। कोरोना (corona in raipur) संकट के बीच आपदा में अवसर की स्वार्थसिद्धि के एक मामले में पिछले माह रामकृष्ण अस्पताल (ramkrishna hospital and corona patient) द्वारा एक कोरोना (corona in raipur) मरीज को 10 लाख रुपए का अनुमानित बिल (bill of corona patient) दिए जाने का मामला सामने आया था।

जिसके बाद नवप्रदेश ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। 21 सितंबर को रामकृष्ण अस्पताल के मैनिजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे से इस मामले पर बात करने पर उन्होंने कहा था कि मरीज के इलाज पर 6-6.5 लाख रुपए खर्च हो गए है। और उसे कितने दिन रखा जाएगा यह निश्चित नहीं है, इसलिए 10 लाख रुपए का अनुमानित बिल दिया गया था।

लेकिन अब 30 सितंबर की स्थिति में सीएमचओ रायपुर मीरा बघेल (cmho meera baghel statement on ramkrishan hospital issue) की मानें तो अस्पताल (ramkrishna hospital and corona patient) द्वारा उस मरीज के इलाज का 4 लाख कुछ के बिल का  ब्योरा दिया गया है। बघेल ने हालांकि एग्जेक्ट फिगर नहीं बताया। लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस बिल से संतुष्ट है।

ये दो नोटिस भेजे जा चुके हैं सीएमचओ द्वारा रामकृष्ण को, इनमें से दूसरे में 4 लाख 70 हजार का ब्योरा मंगाने के लिए भेजा गया था।

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सीएमएचओ के बयान से जुदा इन अधिकारियों के बयान :

जबकि छत्तीसगढ़ स्टेट नर्सिंग होम एस्टेब्लिसमेंट एक्ट के शाखा प्रभारी शैलेश ठाकुर ने बताया कि अस्पताल से प्राप्त पत्र में मरीज के इलाज संबंधी 4 लाख 70 हजार रुपए के बिल का जिक्र प्राप्त हुआ है। वहीं मरीज द्वारा एक लाख रुपए से अधिक की राशि जमा किए जाने का भी उल्लेख है। इसके बाद 4 लाख 70 हजार रुपए के बिल (bill of corona patient) का विस्तृत ब्योरा मांगा गया जो मेरी जानकारी में प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं डीएचएस के राम के पांडे ने भी बताया कि अस्पताल की ओर से कहा गया है कि अभी उन्होंने विस्तृत ब्योरा नहीं भेजा है।      

दबाव पड़ा तो दरियादिली

खास बात यह है कि मीडिया में मामला सामने आने के बाद सीएमएचओ बघेल (cmho meera baghel statement on ramkrishna hospital issue) की ओर से रामकृष्ण को नोटिस भी भेजा गया था। अस्पताल से संबंधित कोरोना (corona in raipur) मरीज के इलाज के खर्च का पूरा ब्योरा मंगाया गया था।

बकौल बघेल रामकृष्ण से उन्हें इलाज के खर्च का पूरा ब्योरा प्राप्त हो गया है और वे इस ब्योरे से संतुष्ट हैं। यदि ये 4 लाख या 4 लाख 70 हजार  का आंकड़ा सही है तो ये समझा जा सकता है कि मीडिया में मामला सामने आने के बाद अस्पताल ने प्रेशर में दरियादिली दिखाई। वरना प्रबंधन की ओर से पहले बहुत ज्यादा चार्ज लगाया जा रहा था। क्योंकि 21 तारीख तक की स्थित में ही अस्पताल प्रबंधन की ओर से 6-6.5 लाख रुपए खर्च होने की बात कही जा रही थी।

भला हुआ और भला होना भी चाहिए, पर यह नहीं दिख रहा संभव

मीडिया में मामला सामने आने के बाद एक कोरोना मरीज व उसका परिवार आपदा में अवसर की ठगी का शिकार होने से बच गया। उनका भला हो गया। भला सभी का होना चाहिए। लेकिन फिलहाल यह संभव होता प्रतीत नहीं हो रहा । बड़ा सवाल ये है कि क्या सभी लोग अस्पताल के बिल को मीडिया में वायरल करने का साहस कर सकते हैं। नहीं।

इसलिए नवप्रदेश ने संकट के इस समय में लोगों को जागरूक करने के लिए सीएमएचओ बघेल से संबंधित मरीज के इलाज पर खर्च का वह ब्योरा जानना चाहा जो उनके बताए अनुसार उन्हें रामकृष्ण अस्पताल (ramkrishna hospital and corona patient) से मिला, लेकिन उन्होंने इसके बारे में नहीं बताया। यदि वे बता देतीं तो लोगों को ये पता चलता कि एक सीरीयस पेशेंट के इलाज पर किसी निजी अस्पताल का ईमानदारी वाला खर्च कितना होता है क्योंकि जिस मरीज की यहां बात हो रही है, उसे रामकृष्ण ने अनुमानित बिल पर सीरीयस पेशेंट बताया था।

परस्पर विरोधी बयानों से मरीज व उनके परिजन भ्रमित व परेशान

सीएमएचओ मीरा बघेल ने इस संबंध में बताया कि रामकृष्ण अस्पताल  ने इस मामले में अब जो बिल का जो ब्योरा हमें भेजा है वो शासन की गाइडलाइन के मुताबिक है। जबकि गाइडलाइन में 17 हजार रुपए प्रतिदिन में कोरोना के सीरीयस पेशेंट का इलाज किया जाना तय है। लेकिन नवप्रदेश से बातचीत में डॉ. संदीप दवे इससे इनकार कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वे 17 हजार रुपए में ऐसे मरीजों का इलाज नहीं कर सकते। सीएमएचओ बघेल व डॉ. दवे के परस्पर विरोधी बयानों से न केवल कोरोना के मरीज भ्रमित हैं बल्कि उनके परिजन भी परेशान हैं।

सीएमएचओ के बयान से सुलगते सवाल…

यदि सीएमएचओ मीरा बघेल के अनुसार अस्पताल ने उचित बिल दिया तो उन्होंने रामकृष्ण अस्पताल को विस्तृत ब्योरे के लिए पत्र क्यों लिखा।

जैसा कि दो अधिकारियों ने नवप्रदेश को बताया कि 30 सितंबर तक की स्थिति में अस्पताल की ओर से 4 लाख 70 हजार रुपए के बिल का ब्योरा प्राप्त नहीं हुआ तो फिर सही कौन बौल रहा है। सीएमएचओ या वे दो अन्य अधिकारी।

क्या कहीं निजी अस्पतालों की तरह जिम्मेदारों द्वारा भी तो आपदा में अवसर नहीं तलाशा जा रहा।  

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