Sugar Production : दो साल की अच्छी बारिश का मिलेगा बड़ा फायदा, गन्ना किसानों के लिए आई राहत भरी खबर
लगातार दो वर्षों तक अनुकूल मानसून रहने का असर अब देश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग पर साफ दिखाई देने की उम्मीद (Sugar Production) है। बेहतर बारिश से सिंचाई संसाधनों में सुधार हुआ है, जिससे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में फसल की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। यही वजह है कि नए विपणन वर्ष में गन्ना और चीनी दोनों के उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त पानी, बेहतर रिकवरी और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के चलते इस बार किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आमदनी मिलने की संभावना है। यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो चीनी उद्योग के लिए भी यह साल काफी लाभदायक साबित हो सकता है।
गन्ना उत्पादन 463 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान Sugar Production
रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 विपणन वर्ष में देश में गन्ने का रकबा बढ़कर करीब 5.9 मिलियन हेक्टेयर हो सकता है। वहीं कुल गन्ना उत्पादन 463 मिलियन मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दो प्रतिशत अधिक होगा।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में लगातार अच्छी बारिश से भूजल स्तर और जलाशयों की स्थिति बेहतर हुई है। गन्ना अधिक पानी वाली फसल है, इसलिए सिंचाई की उपलब्धता बढ़ने से उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
अल नीनो के बाद सुधरी खेती की तस्वीर
साल 2023 में अल नीनो के कारण कई इलाकों में जल संकट और सिंचाई की समस्या देखने को मिली थी। लेकिन 2024 और 2025 की अच्छी बारिश ने इस स्थिति में काफी सुधार किया है।
मार्च 2026 में किए गए सर्वेक्षणों में महाराष्ट्र के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति संतोषजनक पाई गई। पर्याप्त नमी और बेहतर सिंचाई के कारण गन्ने में शर्करा की मात्रा बढ़ने की संभावना जताई गई है।
चीनी उत्पादन में 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव
अनुमान के मुताबिक 2026-27 में देश का कुल चीनी उत्पादन 33.6 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच (Sugar Production) सकता है। इसमें करीब 31.4 मिलियन टन क्रिस्टल चीनी और लगभग 62 हजार मीट्रिक टन खांडसारी शामिल रहने का अनुमान है।
यह पिछले वर्ष के संशोधित 30 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक होगा। बेहतर मानसून, मजबूत सिंचाई व्यवस्था और रिकवरी दर में सुधार को इसकी प्रमुख वजह माना गया है।
रिकवरी दर भी होगी बेहतर
रिपोर्ट के अनुसार इस बार चीनी रिकवरी दर बढ़कर 9.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि पिछले वर्ष यह लगभग 8.3 प्रतिशत रही थी। पर्याप्त नमी और बेहतर फसल विकास के कारण गन्ने में सुक्रोज की मात्रा बढ़ने की संभावना है, जिससे चीनी मिलों को अधिक उत्पादन मिलेगा।
एफआरपी और इथेनॉल नीति से बढ़ा किसानों का रुझान
सरकार की फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस यानी एफआरपी व्यवस्था और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत इथेनॉल खरीद की गारंटी भी किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल की बढ़ती मांग के कारण कई किसान कपास, दलहन और अन्य फसलों की बजाय गन्ने की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पिछले साल भारी बारिश से हुआ था नुकसान
हालांकि 2025-26 विपणन वर्ष में महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई हिस्सों में अगस्त से अक्टूबर के दौरान अत्यधिक बारिश और जलभराव के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई थी। इसी वजह से पिछले वर्ष के उत्पादन अनुमान को 465 मिलियन टन से घटाकर 455 मिलियन टन करना पड़ा।
अक्टूबर से शुरू होगा नया पेराई सत्र
रिपोर्ट के मुताबिक 2026-27 का चीनी पेराई सत्र सामान्य कार्यक्रम के अनुसार अक्टूबर 2026 से शुरू होने (Sugar Production) की संभावना है। यदि मौसम अनुकूल रहा और मिलों का संचालन सुचारु रहा तो यह सीजन किसानों और चीनी उद्योग दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
गुड़ और खांडसारी की मांग भी बढ़ेगी
रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया है कि अगले वर्ष गुड़ और खांडसारी का उत्पादन करीब तीन प्रतिशत तक बढ़ सकता है। पारंपरिक और कम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के कारण इन उत्पादों की खपत लगातार बढ़ रही है।



