इंदौर के श्याम नगर इलाके में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) वारंगल (तेलंगाना) के एक 20 वर्षीय होनहार छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक छात्र का नाम राजकुमार कुशवाह था, जिसने सीनियर्स की कथित मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर मौत का रास्ता चुन लिया। मृतक के बड़े भाई ने कॉलेज के सीनियर छात्रों पर रैगिंग, मारपीट और करियर बर्बाद करने की धमकी देने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद से पीड़ित परिवार में मातम पसरा हुआ है।
भाई के काम पर जाते ही उठाया आत्मघाती कदम
थाना प्रभारी सुशील पटेल से मिली जानकारी के अनुसार, मूल रूप से आदापुर चंपारण (बिहार) का रहने वाला राजकुमार (20 वर्ष), पुत्र रामकिशोर कुशवाह, इंदौर के श्याम नगर में अपने बड़े भाई हरदयाल के साथ रहता था। हरदयाल यहां एक रेडीमेड कपड़ा कारखाने में मजदूरी करता है। गुरुवार की रात जब दोनों भाई काम से लौटकर घर आए, तो कुछ ही देर बाद राजकुमार ने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। भाई हरदयाल ने जब दरवाजा तोड़ा तो राजकुमार फंदे पर लटका मिला। वह आनन-फानन में उसे गंभीर हालत में नंदानगर स्थित अस्पताल लेकर भागा, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया।
6 लाख का कर्ज लेकर गया था हैदराबाद
रोते-बिलखते बड़े भाई हरदयाल ने बताया कि राजकुमार पढ़ाई में बहुत होनहार था और उसका चयन एनआईटी वारंगल में बीटेक के लिए हुआ था। पिछले साल ही उसने राजकुमार की पढ़ाई के लिए 6 लाख का बैंक ऋण (एजुकेशन लोन) लिया था और उसे हैदराबाद भेजा था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन कॉलेज में सीनियर छात्रों ने उसे रैगिंग के नाम पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
हरदयाल के मुताबिक, राजकुमार के साथ कॉलेज में बेरहमी से मारपीट की जाती थी। जब उसने इस बात की शिकायत कॉलेज प्रशासन या सीनियर्स से की, तो आरोपियों ने उसे और ज्यादा धमकाना शुरू कर दिया। सीनियर्स ने उसे सीधे शब्दों में चैलेंज किया था कि ‘तुम चाहे कितनी भी पढ़ाई कर लो, हम तुम्हें कॉलेज में कभी पास नहीं होने देंगे।’ इस खौफनाक धमकी और प्रताड़ना के बाद राजकुमार गहरे डिप्रेशन में चला गया और वह गंभीर रूप से बीमार हो गया। हरदयाल ने एक बार हैदराबाद जाकर उसका इलाज भी करवाया था।
मानसिक संतुलन खो बैठा था राजकुमार
लगातार मिल रही धमकियों से डरकर राजकुमार महज 10 दिन पहले ही अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर हमेशा के लिए इंदौर लौट आया था। इंदौर आने के बाद उसकी मानसिक स्थिति पूरी तरह बिगड़ चुकी थी और वह बहकी-बहकी बातें करने लगा था। वह बार-बार रोते हुए कहता था कि ‘मेरा पूरा करियर तबाह हो गया है, अब इतना पढ़ने का कोई फायदा नहीं है।’
छोटा भाई कहीं कोई गलत कदम न उठा ले, इस डर से हरदयाल ने उसे अकेला छोड़ना बंद कर दिया था। वह उसे चौबीसों घंटे अपने साथ रखता था और अपने साथ कारखाने भी ले जाता था। लेकिन गुरुवार की रात मौत के सौदागरों का खौफ उस पर इस कदर हावी हुआ कि उसने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली। इंदौर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया है और भाई के बयानों के आधार पर एनआईटी वारंगल प्रबंधन और आरोपी छात्रों के खिलाफ तकनीकी जांच और संपर्क साधने की तैयारी कर रही है।
